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लुधियाना में 100 करोड़ की जमीन पर कब्जे का मामला:हाईकोर्ट सख्त; 6 एकड़ है पुलिस जमीन, सरकार से मांगा मांगा अपडेटेड हलफनामा




पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने लुधियाना में रेलवे स्टेशन के सामने स्थित करीब 6 एकड़ की बहुमूल्य पुलिस जमीन पर कथित कब्जों के मामले में सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि वह कब्जा हटाने की कार्रवाई और लंबित सिविल मामलों की मौजूदा स्थिति पर अपडेटेड हलफनामा दाखिल करे। जनहित याचिका (PIL) की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य के वकील से कहा कि मामले में अब तक क्या प्रगति हुई है, इसकी ताजा जानकारी रिकॉर्ड पर रखी जाए। मामले की अगली सुनवाई 23 अप्रैल 2026 तय की गई है। प्राइम लोकेशन वाली जमीन से जुड़ा है मामला
यह मामला शहर की उस प्राइम लोकेशन वाली जमीन से जुड़ा है, जिसकी कीमत करीब 100 करोड़ रुपए आंकी गई है। बताया जाता है कि यह जमीन पहले पुलिस के रिहायशी क्वार्टर और अस्तबल के रूप में इस्तेमाल होती थी, जिसे 1950 के दशक में पुलिस के सिविल लाइंस शिफ्ट होने के बाद खाली कर दिया गया था। इसके बाद से इस जमीन पर कई लोगों द्वारा कथित तौर पर कब्जे किए गए, जिनमें कुछ प्रभावशाली व्यक्ति भी शामिल बताए जा रहे हैं। मई 2024 में पुलिस ने हाईकोर्ट में दाखिल किया था कब्जों के ब्योरे का हलफनामा
इससे पहले मई 2024 में पुलिस विभाग ने हाईकोर्ट में एक हलफनामा दाखिल कर कब्जों का ब्योरा दिया था। इसमें कहा गया था कि पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (PWD) द्वारा तैयार पुराना नक्शा इस बात की पुष्टि करता है कि जमीन सरकारी है और इसे पब्लिक प्रिमाइसेज माना जाना चाहिए। साथ ही कहा गया था कि कमिश्नरेट पुलिस द्वारा नया नक्शा तैयार होने के बाद सभी कब्जों की पहचान कर पंजाब पब्लिक प्रिमाइसेज एक्ट, 1971 के तहत कार्रवाई की जाएगी। यह मामला 2019 में होजरी कारोबारी सुभाष कुंद्रा उर्फ केट्टी द्वारा दायर जनहित याचिका के जरिए कोर्ट में लाया गया था। याचिका में आरोप लगाया गया था कि बार-बार शिकायतों के बावजूद प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। वहीं, एसडीएम (ईस्ट) की एक पूर्व जांच में सामने आया था कि यह जमीन ‘रेड लाइन’ श्रेणी में आती है और राजस्व रिकॉर्ड में इसकी स्पष्ट मालिकाना स्थिति दर्ज नहीं है। याचिकाकर्ता का कहना है कि इस जमीन को या तो पुलिस विभाग को वापस सौंपा जाए या फिर सरकार इसे अपने कब्जे में लेकर जनहित के प्रोजेक्ट्स में इस्तेमाल करे। साथ ही, उन्होंने प्रशासन की निष्क्रियता और इस अहम शहरी संपत्ति के दुरुपयोग पर भी सवाल उठाए हैं।



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