spot_imgspot_img

Top 5 This Week

spot_img

Related Posts

ब्रिटेन में सबसे पुराने भारतीय-रेस्तरां पर बंद होने का खतरा:वीरास्वामी की 100 साल पुरानी लीज खत्म, मालिक कोर्ट पहुंचे




ब्रिटेन में मौजूद सबसे पुराने भारतीय रेस्तरां वीरास्वामी पर बंद होने का खतरा बढ़ गया है। जिस इमारत में यह रेस्तरां चलता है, उसका मालिक क्राउन एस्टेट है। क्राउन एस्टेट ब्रिटेन की एक बड़ी सरकारी संपत्ति संस्था है, जो राजा या रानी के नाम पर चलती है। अब क्राउन एस्टेट वीरास्वामी की इमारत में कुछ बदलाव और नया निर्माण करना चाहते हैं। इसी वजह से उन्होंने रेस्तरां का किराये का समझौता (लीज) आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया है। वीरास्वामी रेस्तरां की जून 2025 में लीज खत्म हो गई थी। रेस्तरां का कहना है कि अगर लीज नहीं बढ़ाई गई तो उसे 100 साल पुरानी अपनी जगह छोड़नी पड़ेगी। इसलिए रेस्तरां ने इस फैसले को चुनौती देने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया है। 100 साल से चल रहा रेस्तरां वीरास्वामी की शुरुआत अप्रैल 1926 में हुई थी। यह सिर्फ एक रेस्तरां नहीं बल्कि ब्रिटेन में भारतीय खाने के इतिहास का अहम हिस्सा माना जाता है। पिछले एक सदी में यहां कई मशहूर लोग आ चुके हैं। इनमें ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल, अभिनेत्री विवियन ली, अभिनेता मार्लन ब्रैंडो, लॉरेंस ओलिवियर, चार्ली चैपलिन और यहां तक कि महारानी एलिजाबेथ द्वितीय भी शामिल हैं। रेस्तरां का मेन्यू भारत में जन्मे एडवर्ड पामर ने तैयार किया था। उन्हें हैदराबाद के शाही महल में बनने वाले व्यंजनों की रेसिपी अपनी दादी से मिली थी और उसी से प्रेरित होकर उन्होंने यहां का खाना तैयार किया। करी के साथ बीयर पीने की परंपरा यहीं से शुरू हुई वीरास्वामी को 2016 में मिशेलिन स्टार मिला था। यह दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित रेस्तरां सम्मानों में से एक है। रेस्तरां से जुड़ा एक दिलचस्प दावा भी किया जाता है। कहा जाता है कि इंग्लैंड में करी के साथ बीयर पीने की आदत सबसे पहले इसी रेस्तरां से शुरू हुई थी। रेस्तरां के मालिकों के मुताबिक, डेनमार्क के राजा जब भी लंदन आते थे, तो वीरास्वामी में खाना खाने जरूर पहुंचते थे। इतना ही नहीं, उन्होंने अपनी पसंदीदा कार्ल्सबर्ग बीयर का एक पूरा पीपा रेस्तरां में रखवा दिया था ताकि जब भी वे करी खाने आएं, वही बीयर उन्हें परोसी जा सके। यह रेस्तरां दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जर्मन बमबारी (ब्लिट्ज) से भी बच गया। उसने रेस्तरां उद्योग के उतार-चढ़ाव भी देखे, लेकिन अब एक साल से चल रही कानूनी लड़ाई के बाद उसके अस्तित्व पर सवाल खड़ा हो गया है। 29 जून से 5 दिन चलेगी सुनवाई वीरास्वामी की मूल कंपनी एमडब्ल्यू ईट (MW Eat) 29 जून से शुरू होने वाली पांच दिन की सुनवाई में सेंट्रल लंदन काउंटी कोर्ट में अपना पक्ष रखेगी। क्राउन एस्टेट का कहना है कि वह विक्ट्री हाउस नाम की इमारत के ऊपरी मंजिलों पर मौजूद दफ्तरों में बदलाव करना चाहता है। ये दफ्तर 2023 में आई बाढ़ के बाद बिजली व्यवस्था प्रभावित होने से खाली पड़े हैं। योजना के तहत रेस्तरां और दफ्तरों की एंट्री पॉइंट के बीच की दीवार हटाकर एक बड़ा रिसेप्शन एरिया बनाया जाएगा। क्राउन एस्टेट का कहना है कि इससे वह ऑफिस का किराया काफी बढ़ा सकेगा। हालांकि, रेस्तरां के मालिक इस तर्क से सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि मरम्मत और नवीनीकरण का काम रेस्तरां को हटाए बिना भी किया जा सकता है। क्राउन एस्टेट ने जून 2025 में वीरास्वामी रेस्तरां की सालाना 2.05 लाख पाउंड (करीब 2.6 करोड़ रुपए) की लीज को रेन्यू करने से मना कर दिया था। अगर अदालत में रेस्तरां हार जाता है तो जिस जगह पर वह अभी चल रहा है, उसे दफ्तरों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। 50 लाख पाउंड तक पहुंच सकता है खर्च रेस्तरां की मालिक कंपनी एमडब्ल्यू ईट का कहना है कि अगर उसे 100 साल पुरानी इस जगह को छोड़ना पड़ा, तो मामला सिर्फ सामान उठाकर दूसरी जगह जाने का नहीं होगा। कंपनी के मुताबिक, सबसे पहले उसे लंदन के वेस्ट एंड जैसे महंगे इलाके में कोई नई जगह ढूंढनी पड़ेगी। इसके बाद उस जगह को वीरास्वामी जैसे प्रतिष्ठित रेस्तरां के स्तर के अनुरूप तैयार करना होगा। इसमें रसोई, डाइनिंग एरिया, इंटीरियर, फर्नीचर, बिजली-पानी की व्यवस्था और लाइसेंस जैसी कई चीजों पर बड़ा खर्च आएगा। इसके अलावा, स्थानांतरण के दौरान रेस्तरां को कुछ समय के लिए बंद भी करना पड़ सकता है। इस दौरान उसकी आय पूरी तरह रुक जाएगी, जबकि कर्मचारियों का वेतन, प्रशासनिक खर्च और अन्य भुगतान जारी रहेंगे। कंपनी का कहना है कि 100 साल पुरानी पहचान वाली जगह छोड़ने से ग्राहकों का एक हिस्सा भी खो सकता है, जिसका आर्थिक असर अलग होगा। इन्हीं सभी खर्चों को जोड़कर एमडब्ल्यू ईट का अनुमान है कि नई जगह पर जाने की कुल लागत करीब 50 लाख पाउंड (लगभग 57-58 करोड़ रुपये) तक पहुंच सकती है। कंपनी का आरोप है कि क्राउन एस्टेट ने जो आर्थिक मुआवजा देने की पेशकश की है, वह इस अनुमानित खर्च का केवल एक छोटा हिस्सा ही कवर करेगा। इसलिए उनके लिए दूसरी जगह जाना आर्थिक रूप से बेहद मुश्किल होगा।



Source link

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

Popular Articles