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बकरियां बचाने पर पंजाबी वकील पर अमेरिका में क्रिमिनल केस:कैलिफोर्निया में 2 को फार्म से निकाला, 6 साल सजा हो सकती; लाइसेंस पर भी खतरा




पंजाब के एक युवक पर कैलिफोर्निया में दो बकरियों की जान बचाने के मामले में क्रिमिनल केस दर्ज कर दिया गया। जल्द मामले में कोर्ट ट्रायल शुरू होने जा रहा है। आरोपी की पहचान तजिंदर उर्फ ताज उप्पल के रूप में हुई है, जो कैलिफोर्निया में वकील हैं और पशु अधिकारों से जुड़े अभियानों में एक्टिव रहते हैं। केस के बाद अब उनकी नौकरी और वकील के लाइसेंस पर भी खतरा मंडरा रहा है। घटना 27 मई 2025 को स्ट्रैटफोर्ड इलाके की है। यहां वेरा गोट डेयरी से कुछ पशु-अधिकार कार्यकर्ताओं ने दो बकरी के बच्चों, फोबी और सीलिया को बाहर निकाला था। फार्म पर उनकी हालत ठीक नहीं थी। बाहर लाने के बाद डॉक्टरों ने जांच में उन्हें निमोनिया और आंखों की बीमारी से ग्रस्त पाया। इलाज के बाद दोनों बकरियां ठीक हो गईं, लेकिन इसके बाद बकरी फार्म चलाने वाली फर्म ने उप्पल सहित 4 लोगों के खिलाफ क्रिमिनल केस कर दिया। पढ़िए क्या है पूरा मामला… बकरियां चुराने, बिना परमिशन प्लाट में घुसने के आरोप पंजाबी मूल के ताज उप्पल सिख वकील और एक्टिविस्ट हैं। वह पशु अधिकारों को लेकर लंबे समय से सक्रिय हैं। किंग्स काउंटी के डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी ने इन पर ग्रैंड थेफ्ट ऑफ लाइवस्टॉक, साजिश और बिना अनुमति जमीन में घुसने जैसे आरोप लगाए हैं। 6 साल तक की सजा हो सकती पंजाबी समुदाय के लोगों का मानना है कि आरोप गंभीर हैं और अगर अदालत में ये साबित हो जाते हैं तो ताज उप्पल को करीब 6 साल तक की सजा हो सकती है। सभी आरोपियों ने कहा कि वे निर्दोष हैं और वे मुकदमे का सामना करने के लिए तैयार हैं। बकरी फार्म ने इसे कानून के खिलाफ बताया केस करने वाले पक्ष ने कहा कि किसी प्राइवेट फार्म से जानवरों को बिना अनुमति ले जाना कानून के खिलाफ है। पुलिस और प्रशासन ने इस घटना को बचाव अभियान नहीं, बल्कि चोरी और साजिश से जुड़ा मामला माना है। यही वजह है कि अब यह केस सिर्फ दो बकरियों की कहानी नहीं रहा, बल्कि पशु अधिकार, बकरी फार्मिंग, प्राइवेट प्रापर्टी और नैतिक जिम्मेदारी के बीच टकराव बन गया है। उप्पल बोले- बकरियां मर रही थीं, बचाने गए ताज उप्पल की संस्था डायरेक्ट एक्शन एवरीवेयर का कहना है कि उन्होंने फार्म पर जानवरों की हालत बहुत खराब देखी थी। वहां हजारों बकरियों को बंद रखा गया था। कई जगह मृत जानवरों के ढेर दिखाई दिए। माएं और उनके बच्चे अलग-अलग रखे जा रहे थे। इसी वजह से कार्यकर्ताओं ने मजबूरी में कदम उठाया। उनका तर्क है कि जब प्रशासन या फार्म प्रबंधन ने हालात सुधारने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए, तब जानवरों को बचाना इंसानियत के दायरे में आने वाला काम था। राइट टू रेस्क्यू की बहस शुरू हुई यह मामला 27 मई 2025 की घटना से शुरू हुआ। 2026 में जांच के बाद पुलिस ने क्रिमिनल केस किया है और कोर्ट ट्रायल की तैयारी है। कोर्ट ट्रायल और केस होने से मामला एक बार फिर चर्चा में है। सोशल मीडिया पर इसे लेकर राइट टू रेस्क्यू की बहस शुरू हो गई है। कई लोग इसे इंसानियत की जीत बता रहे हैं, तो कुछ लोग इसे कानून तोड़ने वाला कदम बता रहे हैं। लोगों का मानना है कि ताज उप्पल और उनके साथियों का यह मामला इमोशनल के साथ कानूनी भी है। आने वाले दिनों में अदालत का फैसला इस पर बहस को और छेड़ेगा।



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