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फरीदाबाद में नौ साल बाद सेशन कोर्ट का फैसला:भ्रूण लिंग जांच और हत्या के आरोपों से अस्पताल संचालक बरी, 1.20 लाख रुपये जुर्माना लगाया




फरीदाबाद में करीब नौ वर्ष पुराने चर्चित बरेजा अस्पताल मामले में सेशन कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। गांव फतेहपुर बिल्लोच स्थित बरेजा अस्पताल के संचालक मनोज कुमार बरेजा को भ्रूण लिंग जांच, भ्रूण हत्या और अवैध गर्भपात जैसे गंभीर आरोपों से राहत मिल गई है। एडिशनल सेशन जज पुरुषोत्तम कुमार की अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष इन आरोपों को ठोस और विश्वसनीय साक्ष्यों के आधार पर सिद्ध नहीं कर सका। हालांकि, बिना वैध लाइसेंस एलोपैथिक दवाओं का भंडारण करने के मामले में अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराया और पहले से काटी गई न्यायिक हिरासत की अवधि की सजा के साथ 1 लाख 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। साल 2017 में की थी छापेमारी यह मामला 12 मई 2017 का है, जब स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर बरेजा अस्पताल में छापेमारी की थी। विभाग का आरोप था कि अस्पताल में भ्रूण लिंग जांच, अवैध गर्भपात और बिना आवश्यक अनुमति के चिकित्सा गतिविधियां संचालित की जा रही थीं। कार्रवाई के दौरान टीम ने एलोपैथिक दवाएं, चिकित्सा उपकरण, अल्ट्रासाउंड प्रोब, ओपीडी रजिस्टर और अन्य दस्तावेज अपने कब्जे में लिए थे। सबूत ना मिलने पर कोर्ट ने बरी कर दिया मुकदमे की सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि जांच एजेंसी ऐसा कोई प्रत्यक्ष या परिस्थितिजन्य साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सकी, जिससे यह साबित हो कि अस्पताल में वास्तव में भ्रूण लिंग जांच या अवैध गर्भपात किया गया था। छापेमारी के समय अस्पताल में कोई गर्भवती महिला या संबंधित मरीज मौजूद नहीं था। न किसी पीड़ित महिला का बयान रिकॉर्ड पर लाया गया और न ही किसी मरीज को गवाह के रूप में अदालत में पेश किया गया। छापेमारी वाले दिन के नहीं थे दस्तावेज अदालत ने यह भी माना कि जब्त किए गए दस्तावेज छापेमारी की तारीख से संबंधित नहीं थे। अस्पताल के रिकॉर्ड में जिन अन्य चिकित्सकों के नाम दर्ज थे, उनसे भी जांच एजेंसी ने पूछताछ नहीं की। इसके अलावा घटनास्थल की फोटो या वीडियोग्राफी जैसे साक्ष्य भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत नहीं किए गए, जिससे अभियोजन के आरोपों की पुष्टि हो सके। फैसले में अदालत ने स्पष्ट कहा कि केवल अल्ट्रासाउंड मशीन का प्रोब या अन्य चिकित्सा उपकरण बरामद होने से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि अस्पताल में भ्रूण लिंग जांच या अवैध गर्भपात किया जा रहा था। ऐसे मामलों में आरोप सिद्ध करने के लिए संदेह से परे प्रमाण आवश्यक होते हैं, जिनका अभाव इस मामले में रहा। 1.20 लाख रुपये जुर्माना लगाने का आदेश दिया हालांकि अदालत ने यह भी माना कि छापेमारी के दौरान अस्पताल से बड़ी मात्रा में एलोपैथिक दवाएं बरामद हुई थीं। आरोपी मनोज कुमार बरेजा इन दवाओं के भंडारण के लिए वैध ड्रग लाइसेंस अथवा खरीद से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। इसी आधार पर अदालत ने उसे ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत दोषी करार देते हुए सजा और 1.20 लाख रुपये जुर्माना लगाने का आदेश दिया।



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