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महंत फ़ाउंडेशन की ओर से संस्थापक एवं अध्यक्ष सुनील अचलेष महंत के नेतृत्व में सैली रोड पर रोष प्रदर्शन किया गया। जिसमें कार्यकर्ताओं ने जम्मू-कश्मीर के पुस्तकालयों व सरकारी विद्यालयों में वितरित की गई कथित विवादित पुस्तक ‘ग्रेट पर्सोनेलिटीज एंड लेजेंड ऑफ जेएंडके (सीरीज-4) के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान राष्ट्रविरोधी विचारों और विवादित साहित्य को युवाओं व विद्यार्थियों तक पहुंचाने के प्रयासों का आरोप लगाकर जोरदार नारेबाजी भी की गई।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस किताब में आतंकवादियों जैसे मकबूल भट्ट और अलगाववादी नेताओं सैयद अली शाह गिलानी और मसरत आलम को ‘महान हस्तियों’ के रूप में दिखाया गया है। इसके अलावा, पुस्तक में जम्मू-कश्मीर के लिए ‘इंडियन ऑक्यूपाइड कश्मीर’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया, जो भारत की संप्रभुता का सीधा उल्लंघन माना गया।
इस दौरान कार्यकर्ताओं ने अपना तीव्र रोष व्यक्त करते हुए उक्त पुस्तक की 10 प्रतियों का दहन किया। फाउंडेशन ने भारत के गृह मंत्री से इस पूरे मामले का तत्काल संज्ञान लेकर सभी प्रतियां जब्त करने और जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
भावी पीढ़ी के मन में राष्ट्रविरोधी सोच का ज़हर घोलने का प्रयास: सुनील अचलेष महंत
प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए सुनील अचलेष महंत ने कहा कि सरकारी धन से खरीदी गई पुस्तक में कथित तौर पर आतंकवाद तथा अलगाववाद से जुड़े व्यक्तियों का महिमामंडन किया गया है। उन्होंने कहा कि ये केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं है, बल्कि देश की भावी पीढ़ी के मन में राष्ट्रविरोधी सोच का ज़हर घोलने का एक गंभीर और सुनियोजित प्रयास है। इसकी निष्पक्ष, समयबद्ध और उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों को कानून के अनुसार कड़ी से कड़ी सजा दी जानी चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि भारत का टेक्सपेयर अपने बच्चों को राष्ट्रभक्ति, संविधान और राष्ट्रीय एकता का पाठ पढ़ाने के लिए टैक्स देता है, न कि ऐसे साहित्य के लिए जिस पर आतंकवाद और अलगाववाद का महिमामंडन करने के गंभीर आरोप लग रहे हों। शिक्षा व्यवस्था के माध्यम से राष्ट्रविरोधी विचारों को बढ़ावा देने का कोई भी प्रयास किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
महंत फ़ाउंडेशन ने गृह मंत्री के समक्ष रखीं तीन प्रमुख मांगें
प्रदर्शन के माध्यम से संगठन ने केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय से निम्नलिखित मांगें स्पष्ट की हैं:
किताबें तुरंत जब्त हों: विवादित पुस्तक की सभी प्रतियों को तत्काल प्रभाव से देश भर से जब्त किया जाए।
उच्चस्तरीय जांच हो: पूरे मामले की एक उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो पुस्तक के प्रकाशन, अनुमोदन एवं वितरण के लिए जिम्मेदार अधिकारियों एवं संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध देशद्रोह व अन्य कठोर धाराओं के तहत कार्रवाई की जाए।
समीक्षा की नई व्यवस्था बने: भविष्य में सरकारी विद्यालयों में वितरित होने वाली प्रत्येक पुस्तक की राष्ट्रीय स्तर पर विशेषज्ञों से गहन समीक्षा कराई जाए।
सुनील अचलेष महंत ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि भारत की शिक्षा व्यवस्था राष्ट्रनिर्माण का माध्यम है, राष्ट्रविरोधी विचारों का नहीं। देश के बच्चों के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का वैचारिक खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जाएगा।
सैली रोड पर हुए इस प्रदर्शन के दौरान विशाल तेजपाल, अंशुल शर्मा, सौरव तूर, सक्षम झा, शुभम महाजन, तरुण शर्मा, साहिल एवं अंशुल सहित महंत फ़ाउंडेशन के अनेक प्रमुख पदाधिकारी व कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में केंद्र सरकार से इस गंभीर मुद्दे पर तत्काल और बेहद सख्त रुख अपनाने की अपील की।
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पठानकोट में महंत फाउंडेशन का प्रदर्शन:जम्मू-कश्मीर की कथित विवादित पुस्तक की प्रतियां जलाईं; गृह मंत्री से तत्काल कार्रवाई की मांग







