आए दिन बिजली सप्लाई में आ रही खराबी और कई-कई घंटों के अघोषित बिजली कटों से गुस्साए करीब 10 गांवों के लोगों का सब्र बीती रात को टूट गया। भड़के ग्रामीणों ने रात करीब 1 बजे सीमांत क्षेत्र से जिला मुख्यालय को जोड़ने वाले एकमात्र प्रवेश द्वार कथलौर पुल पर धरना देकर चक्का जाम कर दिया। इस दौरान ग्रामीणों ने पंजाब सरकार और पावरकॉम के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
रात के सन्नाटे में शुरू हुए इस आकस्मिक धरने के कारण कथलौर पुल पर वाहनों का आवागमन पूरी तरह से ठप हो गया और पुल के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। पुल के नाके पर तैनात पुलिस कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर लोगों को समझा-बुझाकर धरना समाप्त करवाने का प्रयास किया।
लेकिन, ग्रामीणों ने पुलिस की एक न सुनी और दो टूक शब्दों में कहा कि जब तक विभाग या प्रशासन के उच्च अधिकारी मौके पर आकर उनकी समस्या का पक्का समाधान नहीं करते, तब तक धरना जारी रहेगा। हालांकि, बाद में राहगीरों की परेशानी को देखते हुए ग्रामीणों ने मानवता के नाते वाहनों को निकालने के लिए रास्ता साफ कर दिया।
स्टोन क्रेशरों को बिजली देने के लिए काटे जाते हैं घरों के कनेक्शन
धरने पर बैठे ग्रामीणों ने बिजली विभाग के स्थानीय कर्मचारियों पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि लोगों ने कहा कि पिछले एक वर्ष से हमारे एरिया के कबीर दास गांव और आसपास के क्षेत्रों में यह समस्या बनी हुई है। जैसे ही शाम होती है, उनके घरों की बिजली काट दी जाती है। हैरानी की बात यह है कि इसी एरिया में चल रहे स्टोन क्रेशर यूनिटों की बिजली सप्लाई बिना किसी बाधा के सुचारू रूप से चलती रहती है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि स्थानीय बिजली कर्मचारियों की मिलीभगत से स्टोन क्रेशर यूनिटों को फायदा पहुंचाने के लिए गरीब लोगों के घरों की बत्ती गुल की जाती है। इसके अलावा, लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि विभाग से सेवानिवृत्त हो चुका एक पूर्व कर्मचारी भी जानबूझकर उनके एरिया की बिजली सप्लाई से छेड़छाड़ करता है। साल भर से मिल रही नामात्र बिजली मौके पर मौजूद ग्रामीण हैरी सिंह, बलविंदर सिंह और मोहनलाल आदि ने रोष व्यक्त करते हुए बताया कि पिछले एक साल से उनके क्षेत्र के करीब 10 गांवों में केवल नामात्र बिजली सप्लाई मिल रही है। ग्रामीण इस समस्या को लेकर लंबे समय से पावरकॉम के अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। जब बिजली गुल होती है, तो संबंधित कार्यालय के अधिकारी और कर्मचारी लोगों के फोन तक उठाना मुनासिब नहीं समझते। ग्रामीणों ने बताया कि इससे पहले भी वे इसी समस्या को लेकर सब-स्टेशन मनवाल मंगवाल में भारी रोष प्रदर्शन कर चुके हैं, लेकिन तब दिए गए आश्वासनों के बावजूद आज तक समस्या का समाधान नहीं हुआ। इसी मजबूरी के कारण उन्हें आधी रात को सड़कों पर उतरना पड़ा। जेई का गैर-जिम्मेदाराना जवाब: मुझे नहीं पता लोग क्या बोलते हैं इस पूरे मामले को लेकर जब बिजली विभाग के संबंधित जूनियर इंजीनियर रजनीश कुमार से संपर्क किया गया, तो उन्होंने तकनीकी खराबी का हवाला देते हुए पल्ला झाड़ लिया। जेई रजनीश कुमार ने कहा कि लाइन में कुछ तकनीकी खराबी आ गई थी, जिसके कारण बिजली बंद हुई थी। अब उसे ठीक करके सप्लाई बहाल कर दी गई है। जब उनसे ग्रामीणों द्वारा लगाए जा रहे गंभीर आरोपों और पिछले एक साल से लगातार आ रही इस समस्या के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने बेहद गैर-जिम्मेदाराना रवैया अपनाते हुए कहा, मुझे नहीं पता लोग क्या बोलते हैं। विभाग के इस रवैये से साफ है कि सीमांत क्षेत्र के लोगों की सुध लेने वाला कोई नहीं है।
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पठानकोट में कथलौर पुल पर धरना:बिजली कटों से परेशान 10 गांव के लोगों ने किया चक्का जाम, 2 घंटे चला प्रदर्शन
