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पठानकोट के एक 21 वर्षीय युवक से 4 लाख रुपए की ठगी कर इमिग्रेशन फ्रॉड किया। पहले उसे क्रोएशिया भेजने का झांसा दिया, फिर रशिया भेजा गया। लेकिन, विजिटर-टू-वर्क वीजा दिलवाने की बात कहकर उसे टूरिस्ट वीजा थमा दिया। वीजा खत्म हुआ तो युवक को रशिया के थाने में भी जाना पड़ा। पिता ने किसी तरह रिश्तेदारों से उधारी लेकर बेटे की किसी तरह वतन वापसी करवाई। थाना नरोट जैमल सिंह की पुलिस ने पीड़ित परिवार की शिकायत पर गहन जांच के बाद एक फर्जी ट्रैवल एजेंट के खिलाफ धोखाधड़ी और अवैध मानव तस्करी की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
पुलिस ने 7 महीने चली जांच के बाद गुरदासपुर के रहने वाले आरोपी एजेंट जॉन के खिलाफ धोखाधड़ी, पंजाब ट्रैवल प्रोफेशनल्स रेगुलेशन एक्ट और इमिग्रेशन एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी जॉन के पास ट्रैवल एजेंट के तौर पर काम करने का कोई वैध लाइसेंस भी था।
पहले क्रोएशिया का भेजने का दिया था झांसा
गांव सरोटा के निवासी जोध सिंह ने बताया कि उनका 21 वर्षीय बेटा गौरव सिंह विदेश जाना चाहता था। इस दौरान उनका संपर्क आरोपी एजेंट जॉन से हुआ, जिसने गौरव को क्रोएशिया में एक अच्छी कंपनी में ‘पैकेजिंग’ के काम पर लगवाने और 1,15,000 रुपये प्रति महीना वेतन दिलवाने का भरोसा दिया। आरोपी ने एडवांस के तौर पर 1 लाख रुपये मांगे, जिसे पीड़ित परिवार ने पिछले साल 28 मार्च को बैंक ट्रांसफर के जरिए जॉन पीटर के खाते में भेज दिया। पैसे लेने के बाद आरोपी महीनों तक टालमटोल करता रहा और अक्टूबर 2025 में अचानक कहा कि क्रोएशिया का वीजा रिजेक्ट हो गया है।
‘विज़िटर टू वर्क’ के नाम पर रूस भेजा, वहां पुलिस ने लिया हिरासत में
पीड़ित गौरव ने बताया कि क्रोएशिया का वीजा रिजेक्ट होने की बात कहकर आरोपी ने उसके परिवार को झांसा दिया कि उसके पास रूस के वीजे उपलब्ध हैं। एजेंट ने दावा किया कि वह उसे 3 महीने के टूरिस्ट वीजे पर रूस भेजेगा और वहां पहुंचते ही उसे ‘वर्क परमिट’ में बदलवाकर कॉस्मेटिक्स पैकेजिंग की नौकरी पर लगवा देगा। इस काम के लिए आरोपी ने 3 लाख रुपये और मांगे। मजबूरन पीड़ित पिता ने अपनी जमीन पर बैंक लिमिट बनवाकर और अपने एक दोस्त अमित कुमार से मदद लेकर कुल 3 लाख रुपये आरोपी को दे दिए।
गौरव सिंह ने बताया कि वो 19 अक्टूबर 2025 को रूस के लिए रवाना हुआ और 20 अक्टूबर को मॉस्को पहुंचा। वहां पहुंचने के बाद आरोपी ने ‘एयरपोर्ट क्लीयरेंस’ के नाम पर रूस में मौजूद अपने एक साथी राहुल के खाते में 35 हजार रुपये और ट्रांसफर करवाए।
वीजा हुआ एक्सपायर, पुलिस ने हिरासत में लिया
गौरव ने बताया कि मॉस्को पहुंचने के बाद उसे कोई स्थायी काम नहीं दिया गया। आरोपी ने उसे कुछ जगहों पर भेजा लेकिन वहां कोई काम नहीं मिला और बाद में केवल 50 हजार रुपये प्रति महीने की नौकरी की बात कही, जो कि तय वादे से बहुत कम थी। जब गौरव ने इसका विरोध किया तो आरोपी एजेंट ने साफ कह दिया कि रूस में कोई काम नहीं है और वापस भारत लौट जाओ। इसके बाद आरोपी ने पीड़ित परिवार का फोन उठाना और मैसेज का जवाब देना बंद कर दिया।
गौरव ने बताया कि टूरिस्ट वीजा की अवधि समाप्त होने के कारण उसे रूस में वहां की स्थानीय पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इसके बाद पिता जोध सिंह ने किसी तरह और पैसों का इंतजाम कर बेटे की वापसी की टिकट करवाई और उसे सुरक्षित भारत वापस बुलाया।
पुलिस जांच में बैंक रिकॉर्ड से हुई पुष्टि
थाना नरोट जैमल सिंह के अंतर्गत आने वाली चौकी बमियाल के इंचार्ज एसआई विजय कुमार द्वारा इस मामले की प्रारंभिक जांच की गई। पुलिस जांच के दौरान पीड़ित परिवार द्वारा जॉन के एचडीएफसी बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए पैसों के रिकॉर्ड की पूरी पुष्टि हुई है। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश और कानूनी राय के बाद पुलिस ने आरोपी जॉन पीटर के खिलाफ मामला दर्ज कर आगे की तफ्तीश एएसआई बलकार सिंह को सौंप दी है।
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पठानकोट के युवक से क्रोएशिया भेजने के नाम पर ठगी:4 लाख की धोखाधड़ी, रशिया में पुलिस में पकड़ा, 7 महीने बाद मामला दर्ज







