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पठानकोट के मल्लपुर झुंबर में जलभराव, 150 परिवार प्रभावित:बारिश से मकानों पर खतरा, स्कूल नहीं जा पा रहे बच्चे




लगातार हो रही बारिश के चलते शेरपुर-मल्लपुर और झुंबर क्षेत्र में जलभराव की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। पानी की निकासी का प्राकृतिक रास्ता बंद होने के कारण करीब 150 परिवार बुरी तरह प्रभावित हो गए हैं। कई घरों के आसपास और अंदर तक पानी भर जाने से मकानों की नींव कमजोर पड़ने लगी है, जिससे उनके गिरने का खतरा लगातार मंडरा रहा है।
घरों में पानी भरने और जलभराव के बीच जहरीले जीव-जंतुओं के निकलने से क्षेत्रवासियों में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल राहत और स्थायी समाधान की गुहार लगाई है। 5-6 वर्षों से बनी है समस्या, पुलिया बंद होने से बिगड़े हालात गांव मल्लपुर निवासी नेक राम ने बताया कि जलभराव की यह समस्या पिछले 5-6 वर्षों से बनी हुई है। उन्होंने कहा कि पहले भी जनप्रतिनिधियों को शिकायत देने के बाद जेसीबी (JCB) मशीन से अस्थायी निकासी करवाई गई थी, लेकिन अब दूसरी ओर स्थित पुलिया को बंद कर दिए जाने से पूरा पानी एक ही स्थान पर जमा हो रहा है। इसके कारण बच्चों और राहगीरों के लिए हादसों का खतरा बढ़ गया है। उन्होंने मांग की है कि बंद पुलिया को बिना देरी तुरंत खुलवाया जाए। प्राकृतिक रास्ता बंद होने से कंधों पर बच्चों को ले जाने को मजबूर लोग गांव शेरपुर निवासी पुन्नू राम ने बताया कि पुराने किसानों द्वारा जमीन बेचने के बाद नए मालिकों ने प्राकृतिक जल निकासी के रास्ते को बंद कर दिया है। इसके कारण पूरे इलाके का पानी रुक गया है और 100 से 150 घर जलमग्न हो चुके हैं। लोगों को कमर तक पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ रहा है और अपने छोटे बच्चों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए कंधों पर उठाकर ले जाना पड़ता है। कमर तक भरा पानी, सांप और जहरीले कीड़ों का बना डर क्षेत्र निवासी संध्या देवी का कहना है कि वह बीते 10-12 वर्षों से इस नारकीय जीवन को जीने को मजबूर हैं। बरसात के दौरान सुओं, कीड़ी और मंगियाल की ओर से आने वाला सारा पानी बहकर उनके इलाके में जमा हो जाता है। पानी का स्तर इतना बढ़ जाता है कि मकानों के लेंटर और दीवारों में दरारें आने का डर सताने लगा है। इसके अलावा, जमा पानी में से सांप और जहरीले कीड़े-मकोड़े निकलकर घरों में घुस रहे हैं, जिससे लोग रात-दिन डर के साए में जीने को मजबूर हैं। बच्चों की पढ़ाई ठप, जनप्रतिनिधियों के दावों की खुली पोल जलभराव का असर बच्चों की शिक्षा पर भी पड़ रहा है। रास्ते पूरी तरह जलमग्न होने के कारण बच्चे कई-कई दिनों तक स्कूल नहीं जा पाते हैं। ग्रामीणों ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि चुनाव के समय जनप्रतिनिधि बड़े-बड़े वादे करके चले जाते हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता। ग्रामीणों की प्रशासन से प्रमुख मांगें क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन से निम्नलिखित मांगों को तुरंत पूरा करने की अपील की है: बंद पुलिया को खोलना: बंद पड़ी पुलिया को तत्काल खुलवाकर पानी की अस्थायी निकासी कराई जाए। स्थायी पक्का नाला: जलभराव की समस्या को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए पक्के नाले का निर्माण कराया जाए। राहत सामग्री व दवाई छिड़काव: प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत दी जाए और बीमारियों व मच्छर-कीड़ों से बचाव के लिए क्षेत्र में कीटनाशक दवाइयों का छिड़काव कराया जाए।



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