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पंथक सम्मेलन से पंजाब सरकार को दो टूक संदेश:धार्मिक मामलों में दखल बर्दाश्त नहीं, शहीदी सप्ताह के बाद होगा बड़ा फैसला




अमृतसर के बाबा बकाला साहिब में आयोजित एक विशाल पंथक सम्मेलन में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) और श्री अकाल तख्त साहिब ने पंजाब सरकार के खिलाफ बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। इसमें सरकार को पंथक के मामलों से दूर रहने की हिदायत दी गई। सिख लीडरशिप ने सरकार द्वारा लाए गए ‘जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी सत्कार संशोधन एक्ट 2026’ पर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराईं। इस सम्मेलन में देश-विदेश से आई सिख जत्थेबंदियों, संत-महापुरुषों और सिख बुद्धिजीवियों ने भारी संख्या में भाग लेकर एकजुटता का संदेश दिया। 15 दिन का अल्टीमेटम खत्म, सरकार ने नहीं दिया जवाब SGPC के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि अकाल तख्त साहिब की ओर से इस विवादित संशोधन एक्ट को लेकर सरकार को 15 दिन का समय (अल्टीमेटम) दिया गया था, लेकिन इस अवधि के बीत जाने के बाद भी सरकार की तरफ से कोई जवाब या स्पष्टीकरण नहीं आया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सिख पंथ से जुड़े किसी भी धार्मिक मामले में निर्णय केवल और केवल सिख मर्यादाओं और स्थापित पंथक परंपराओं के अनुसार ही हो सकते हैं, इसमें किसी बाहरी दखल की कोई गुंजाइश नहीं है। इसके साथ ही धामी ने डेरा सच्चा सौदा प्रमुख के खिलाफ कार्रवाई और मोड़ मंडी विस्फोट मामले की जांच को लेकर भी सरकार की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए। 328 पावन स्वरूप मामला: SIT को सहयोग, लेकिन रिकॉर्ड पर आपत्ति धामी ने 328 पावन स्वरूपों से जुड़े मामले का भी जिक्र किया। उन्होंने दोहराया कि SGPC इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) को अपना पूरा सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है। हालांकि, उन्होंने जांच के नाम पर एसआईटी द्वारा डे-बुक और बैंक रिकॉर्ड मांगे जाने पर कड़ी आपत्ति व्यक्त की और इसे संस्था के आंतरिक मामलों में अनावश्यक दखलअंदाजी बताया। ‘सिख धार्मिक मामलों में सरकारी दखल मंजूर नहीं’ – जत्थेदार गड़गज्ज श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यकारी जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने कहा कि यदि आज सिख समाज ने धार्मिक मामलों में सरकारी हस्तक्षेप को स्वीकार कर लिया तो भविष्य में सरकारें धार्मिक संस्थाओं को अपने इशारों पर चलाने का प्रयास करेंगी, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने सरकार को सीधी चेतावनी दी कि वह पंथक मामलों में राजनीतिक हस्तक्षेप न करे। उन्होंने कहा कि सरकार को पहले ही लिखित अल्टीमेटम दिया गया था, लेकिन उसकी ओर से कोई जवाबी पत्र न भेजना सरकार के अड़ियल रवैये को दर्शाता है। कानून-व्यवस्था पर सवाल और आगामी रणनीति जत्थेदार गड़गज्ज ने पंजाब की वर्तमान कानून-व्यवस्था पर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि प्रदेश में लगातार आपराधिक घटनाएं बढ़ रही हैं और लॉ एंड ऑर्डर चरमरा रहा है, लेकिन सरकार का ध्यान इन बुनियादी प्रशासनिक दायित्वों के बजाय दूसरी राजनीतिक गतिविधियों में ज्यादा दिखाई दे रहा है। सरकार को अपने संवैधानिक दायित्वों पर ध्यान देना चाहिए। सम्मेलन में यह भी ऐलान किया गया कि शहीदी सप्ताह के संपन्न होने के बाद ‘पांच सिंह साहिबानों’ की एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक बुलाई जाएगी। इस बैठक में मौजूदा विवाद और सरकार के उदासीन रुख को लेकर अगली बड़ी रणनीति और कड़े फैसलों पर मुहर लगाई जाएगी। टकराव बढ़ने के आसार बाबा बकाला साहिब में जुटी इस विशाल सभा ने राज्य सरकार को साफ और स्पष्ट संकेत दे दिया है कि सिख धार्मिक संस्थाएं अपने आंतरिक मामलों में किसी भी तरह के सरकारी हस्तक्षेप को स्वीकार करने के मूड में बिल्कुल नहीं हैं। अब देखना होगा कि सिख लीडरशिप के इस कड़े रुख के बाद पंजाब सरकार का अगला कदम क्या होता है।



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