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पंजाब में हड़ताल पर जा सकते हैं एंबुलेंस कर्मचारी:मान सरकार को 15 दिन का अल्टीमेटम; आर-पार की लड़ाई का किया ऐलान




पंजाब में एक बार फिर स्वास्थ्य सेवाओं का पहिया थमने के कगार पर है। लुधियाना के सिविल अस्पताल में ‘108 एंबुलेंस एम्पलाइज एसोसिएशन पंजाब’ की एक अहम और हंगामी बैठक हुई। इस बैठक में सरकार के खिलाफ कर्मचारियों का गुस्सा फूट पड़ा है। पूरे पंजाब के हर जिले से लगभग 150 प्रमुख सदस्य बैठक में पहुंचे, जहां उन्होंने सर्वसम्मति से सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने का ऐलान कर दिया है। कर्मचारियों ने साफ कर दिया है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो पूरे राज्य में प्रदर्शन किया जाएगा । 15 साल और झूठे वादों का पुलिंदा बैठक में कर्मचारियों का दर्द और आक्रोश साफ छलक रहा था। उनका कहना है कि वे पिछले 15 सालों से दिन-रात, महामारी से लेकर हर आपात स्थिति में अपनी जान जोखिम में डालकर जनता की सेवा कर रहे हैं। लेकिन, हर बार सत्ता में आने वाली सरकारों ने उनके साथ केवल विश्वासघात किया है। कर्मचारियों ने बताया कि उन्हें नियमित करने का वादा किया गया था, लेकिन मौजूदा सरकार ने भी पुराने राजनेताओं की तरह ही केवल खोखले वादे किए हैं। जमीनी स्तर पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। यह पहली बार नहीं है जब 108 एंबुलेंस कर्मचारी सड़कों पर उतरे हों। सरकार की वादाखिलाफी का इतिहास लंबा है। पिछली हड़तालों से नहीं लिया सबक, बढ़ा विवाद 2023 का चक्का जाम: पिछले साल इन कर्मचारियों ने 7 दिनों तक पूरे पंजाब में एंबुलेंस सेवाएं पूरी तरह से ठप कर दी थीं। तब दबाव में आकर सरकार ने प्रति माह ₹5,000 वेतन बढ़ाने का लिखित आश्वासन दिया था। लेकिन हैरानी की बात यह है कि आज तक वह पैसा कर्मचारियों के खातों में नहीं पहुंचा है। 2024 की भूख हड़ताल: जब ₹5000 की बढ़ोतरी नहीं हुई, तो इसी साल कर्मचारियों ने हार मानकर भूख हड़ताल भी की, लेकिन अंधी-बहरी सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी। निजी कंपनियों की मनमानी और ओवरटाइम का घोटाला कर्मचारियों का आरोप है कि प्राइवेट कंपनियां उनका जमकर आर्थिक शोषण कर रही हैं। उनसे घंटों अतिरिक्त काम (Overtime) लिया जाता है, लेकिन जब पैसे देने की बारी आती है, तो कंपनी और सरकार दोनों पल्ला झाड़ लेते हैं। एसोसिएशन की प्रमुख मांगें:

निजीकरण का अंत: 108 एंबुलेंस सेवा को प्राइवेट कंपनी के चंगुल से मुक्त कर सीधे पंजाब सरकार के अधीन किया जाए। पक्की नौकरी: 15 सालों से ठेके पर पिस रहे सभी कर्मचारियों को तुरंत नियमित (Permanent) किया जाए। बकाया वेतन वृद्धि: 2023 में किया गया ₹5,000 की सैलरी बढ़ोतरी का वादा तुरंत लागू हो और पिछला एरियर दिया जाए। ओवरटाइम का भुगतान: अब तक किए गए सारे ओवरटाइम का एक-एक पैसा चुकता किया जाए। मान सरकार को 15 दिन की खुली चेतावनी: सड़कों पर उतरेगा परिवार एसोसिएशन ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को स्पष्ट रूप से 15 दिन का अल्टीमेटम दे दिया है। कर्मचारियों का कहना है कि अब उनके सब्र का बांध टूट चुका है।अगर 15 दिनों के भीतर सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो पंजाब भर के 1,500 से अधिक 108 एंबुलेंस कर्मचारी अपने बीवी-बच्चों और पूरे परिवार के साथ सड़कों पर उतरेंगे। शुरुआत में 1 दिन के लिए पूरे पंजाब में 108 एंबुलेंस सेवा पूर्ण रूप से बंद रखी जाएगी। अगर इसके बावजूद सरकार नींद से नहीं जागी, तो यह हड़ताल अनिश्चितकालीन में बदल दी जाएगी।



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