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पंजाब में सफाई कर्मियों की हड़ताल पर हाईकोर्ट सख्त:कहा-ESMA लागू करने पर विचार करे सरकार; 20 जुलाई तक रिपोर्ट की तलब




पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कई नगर परिषदों और नगर पालिकाओं में सफाई कर्मचारियों की जारी हड़ताल पर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को 20 जुलाई तक विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही कहा है कि यदि जरूरत पड़े तो आवश्यक सेवाएं अनुरक्षण अधिनियम (ईएसएमए) लागू करने की संभावना पर भी विचार किया जा सकता है, ताकि सफाई व्यवस्था जल्द बहाल हो सके। जस्टिस पंकज जैन की एकल पीठ ने प्रदीप कुमार, सनीत ग्रेवाल और जसविंदर सेखों की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि हड़ताल से उत्पन्न हालात के समाधान के लिए कर्मचारियों और संबंधित पक्षों से बातचीत की जा रही है। सरकार ने इस संबंध में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के लिए 2 दिन का समय मांगा, जिसे स्वीकार करते हुए अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई तय कर दी। ईएसएमए लागू करने का दिया सुझाव हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि राज्य सरकार आवश्यक सेवाएं अनुरक्षण अधिनियम (ईएसएमए) के प्रावधान लागू करने की संभावना भी तलाश सकती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि जनहित और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है तो सरकार कानून के तहत आवश्यक कदम उठा सकती है। याचिका में सरकार पर लापरवाही का आरोप याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि राज्य सरकार और स्थानीय निकाय समय रहते वैकल्पिक सफाई व्यवस्था करने, आपात योजना तैयार करने और कानूनी प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई करने में विफल रहे हैं। उनका कहना है कि इसी कारण उन्हें हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। बारिश के बीच जगह-जगह कूड़ा जमा याचिका में कहा गया है कि लगातार बारिश के बीच जगह-जगह कूड़ा जमा होने से नालियां जाम हो रही हैं। बारिश का पानी और सीवरेज कूड़े के साथ मिलकर मच्छरों, मक्खियों और अन्य रोग फैलाने वाले कीटों के पनपने का खतरा बढ़ा रहा है। इससे डेंगू, मलेरिया और जलजनित बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है। याचिकाकर्ताओं ने बताया कि स्थानीय निकाय मंत्री और अन्य अधिकारियों को ज्ञापन देकर प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कराने, तत्काल सफाई व्यवस्था बहाल करने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी। याचिका के साथ विभिन्न इलाकों में फैली गंदगी और कूड़े के ढेर की तस्वीरें भी अदालत के समक्ष पेश की गईं। 20 जुलाई को होगी अगली सुनवाई हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि 20 जुलाई तक यह बताया जाए कि हड़ताल से पैदा हुए हालात से निपटने के लिए क्या कदम उठाए गए, सफाई व्यवस्था कितनी बहाल हुई और भविष्य में ऐसी स्थिति से निपटने के लिए क्या स्थायी व्यवस्था की जा रही है। अदालत अब अगली सुनवाई में सरकार की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई पर विचार करेगी।



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