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पंजाब में 'विकसित भारत-ग्राम जी' योजना पर घमासान:मान सरकार ने जारी की अधिसूचना; राजा वड़िंग ने पूछा -BJP के साथ क्या डील हुई?




पंजाब में ग्रामीण रोजगार को लेकर एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। मान सरकार के ग्रामीण विकास और पंचायत विभाग नेनई रोजगार गारंटी योजना विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) (VB-G RAM G) की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। दूसरी तरफ कांग्रेस ने इसे पंजाब विधानसभा के फैसले का अपमान बताते हुए सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पंजाब सरकार के आधिकारिक राजपत्र के अनुसार, राष्ट्रीय विजन ‘विकसित भारत @ 2047’ के तहत राज्य में एक नई विशेष रोजगार योजना को मंजूरी दी गई है। प्रशासनिक सचिव अजीत बालाजी जोशी के हस्ताक्षरों के तहत बीते कल 26 जून को ही यह आदेश जारी किया गया। क्या है ये विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन
125 दिनों के रोजगार की गारंटी: इस योजना के तहत पंजाब के ग्रामीण क्षेत्रों के प्रत्येक परिवार के वयस्क सदस्यों को एक वित्तीय वर्ष में न्यूनतम 125 दिनों के वैधानिक मजदूरी रोजगार (कानूनी गारंटी) की व्यवस्था की गई है।
कब से होगी लागू: यह योजना 1 जुलाई, 2026 से पूरे पंजाब राज्य के अधिसूचित ग्रामीण इलाकों में लागू हो जाएगी।
विपक्ष का हमला, राजा वड़िंग का तीखा बयान
इस अधिसूचना के जारी होते ही पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने मुख्यमंत्री भगवंत मान और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल को आड़े हाथों लिया है। राजा वड़िंग ने सरकार के इस कदम को पंजाबियों के साथ धोखा करार दिया है।
राजा वड़िंग के बड़े सवाल और आरोप:
1. विधानसभा के प्रस्ताव को रातें-रात कैसे बदला?: राजा वड़िंग ने याद दिलाया कि कुछ महीने पहले पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र में इस ‘VB-G RAM G’ योजना को सर्वसम्मति से खारिज कर दिया गया था। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने मिलकर केंद्र के इस कानून के खिलाफ प्रस्ताव पास किया था। फिर अचानक ऐसा क्या बदला कि उसी योजना को अब लागू कर दिया गया?
2. क्या बीजेपी के साथ कोई गुप्त समझौता हुआ है? : कांग्रेस अध्यक्ष ने सीधा आरोप लगाते हुए पूछा, “मुख्यमंत्री भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल पंजाब की जनता को स्पष्ट करें कि केंद्र की भाजपा सरकार के आगे घुटने क्यों टेके गए? क्या इस यू-टर्न के पीछे भाजपा और ‘आप’ के बीच पर्दे के पीछे की कोई राजनीतिक साठगांठ या ‘डील’ हुई है?” 3. पंजाबियों को जवाब चाहिए: उन्होंने कहा कि अगर राज्य की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था (विधानसभा) के फैसलों को सरकार इस तरह रात-रात में पलट देगी, तो पंजाब के अधिकारों की रक्षा कौन करेगा? पंजाब की जनता इस दोगले रवैए पर सरकार से जवाब मांगती है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा: सरकार ने क्यों बदला रुख?
विशेषज्ञों का मानना है कि पंजाब सरकार का यह यू-टर्न प्रशासनिक और वित्तीय मजबूरी का नतीजा हो सकता है।
केंद्रीय फंड रुकने का डर: केंद्र सरकार द्वारा पुरानी मनरेगा (MGNREGA) व्यवस्था को समाप्त कर इस नए कानून को लागू किए जाने के बाद, यदि पंजाब इसे अधिसूचित नहीं करता, तो राज्य को मिलने वाला करोड़ों रुपये का केंद्रीय फंड पूरी तरह रुक जाता।
आर्थिक बोझ: केंद्र और राज्य के बीच 60:40 के फंडिंग पैटर्न के कारण पंजाब ने शुरुआत में इसका विरोध किया था, लेकिन ग्रामीण मजदूरों की नाराजगी और वित्तीय संकट से बचने के लिए आखिरकार सरकार को इसे लागू करना पड़ा।
फिलहाल, इस अधिसूचना ने पंजाब की राजनीति में एक नया उबाल ला दिया है और आने वाले दिनों में इस पर टकराव और बढ़ने के आसार हैं।



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