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नूंह के अस्पताल में बच्चे की मौत, परिजनों का हंगामा:डॉक्टरों पर लगाया लापरवाही का आरोप, एसएमओ बोले- पहले ही थम चुकी थी सांस




नूंह जिले के मांडीखेड़ा स्थित जिला नागरिक अस्पताल में गुरुवार को दो साल के एक बच्चे की मौत के बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया। उन्होंने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को संभाला। मृतक बच्चे की पहचान नूंह निवासी तौफीक के दो वर्षीय पुत्र अनस के रूप में हुई है। बच्चे के पिता तौफीक ने आरोप लगाया कि उनके बेटे को तेज बुखार के बाद तबीयत बिगड़ने पर वे उसे मांडीखेड़ा अस्पताल लाए थे। उनका दावा है कि अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने काफी देर तक बच्चे का इलाज शुरू नहीं किया, जिस कारण उसकी मौत हो गई। परिजन बोले- नहीं मिला समय से इलाज परिजनों का कहना है कि यदि समय पर उपचार मिल जाता तो बच्चे की जान बचाई जा सकती थी। बच्चे की मौत से गुस्साए परिजनों ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की। इस घटना के बाद अस्पताल परिसर में कुछ देर के लिए तनाव का माहौल रहा। वहीं, अस्पताल प्रशासन ने परिजनों के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। जिला नागरिक अस्पताल के सीनियर मेडिकल ऑफिसर डॉ. संदीप मेहता ने बताया कि बच्चे को जब अस्पताल लाया गया, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। उन्होंने यह भी बताया कि बच्चे का इलाज इससे पहले पलवल के किसी अस्पताल में चल रहा था। बच्चे को तुरंत इमरजेंसी ले जाया गया, थम चुकी थी सांस : डा. मेहता डॉ. मेहता के अनुसार, ओपीडी कार्ड बनने के तुरंत बाद बच्चे को इमरजेंसी वार्ड में लाया गया था। डॉक्टरों ने तत्काल जांच की, लेकिन तब तक उसकी सांसें थम चुकी थीं। फिलहाल, पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और अस्पताल प्रशासन तथा परिजनों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।



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