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चंडीगढ़ PGI के तकनीकी कर्मचारियों राहत:कैडर पुनर्गठन लागू, 1100 से ज्यादा के प्रमोशन का रास्ता साफ, 659 के रिकॉर्ड खंगाले गए




चंडीगढ़ पीजीआई में तीन दशक से लंबित तकनीकी कैडर पुनर्गठन का मामला आखिरकार सुलझ गया है। संस्थान प्रशासन ने लैबोरेटरी, एक्स-रे और रेडियोथेरेपी तकनीकी कर्मचारियों से जुड़े कैडर पुनर्गठन और पदोन्नति प्रक्रिया को लागू कर दिया है, जिससे सैकड़ों कर्मचारियों को राहत मिली है। PGI प्रशासन के अनुसार यह मामला पिछले 30 वर्षों से लंबित था। संस्थान की गवर्निंग बॉडी और इंस्टीट्यूट बॉडी से मंजूरी मिलने के बाद तकनीकी कैडरों के पुनर्गठन को लागू किया गया। इसे 1 मार्च 1992 से प्रभावी माना गया है, जिस तारीख से संस्थान के अन्य कर्मचारियों के लिए भी यह व्यवस्था लागू हुई थी। 659 कर्मचारियों के रिकॉर्ड खंगाले गए इस प्रक्रिया को लागू करने के लिए PGI निदेशक प्रो. विवेक लाल ने जुलाई 2025 में एक विशेष सेल का गठन किया था। इस टीम ने 1992 से 2024 तक के रिकॉर्ड की जांच कर पदोन्नति संबंधी मामलों को तैयार किया। पूरे अभ्यास के दौरान लगभग 659 कर्मचारियों के सेवा रिकॉर्ड की समीक्षा की गई और करीब 193 विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) मेमोरेंडम तैयार किए गए। इसके जरिए विभिन्न श्रेणियों में लगभग 1120 पदोन्नतियों की प्रक्रिया पूरी की गई। लैब कैडर में सबसे ज्यादा पदोन्नतियां लैबोरेटरी कैडर में सबसे बड़ा कार्य हुआ, जहां करीब 520 कर्मचारियों से जुड़े 899 पदोन्नति मामलों का निपटारा किया गया। एक्स-रे कैडर में 111 कर्मचारियों से संबंधित 173 पदोन्नतियां और रेडियोथेरेपी कैडर में 28 कर्मचारियों से जुड़े 48 पदोन्नति मामलों को प्रक्रिया में शामिल किया गया। इन पदोन्नतियों में सीनियर टेक्नीशियन, टेक्निकल असिस्टेंट, टेक्निकल ऑफिसर और सीनियर टेक्निकल ऑफिसर जैसे पद शामिल हैं। कर्मचारियों की गरिमा और विकास से जुड़ा मामला पीजीआई के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने इस उपलब्धि को संस्थान के लिए ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि यह केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि कर्मचारियों की गरिमा, पहचान और पेशेवर विकास से जुड़ा एक महत्वपूर्ण विषय था। उन्होंने कहा कि संस्थान हमेशा पारदर्शिता, निष्पक्षता और कर्मचारी हितों के प्रति प्रतिबद्ध रहा है। विशेष सेल और विभागीय पदोन्नति समिति के सदस्यों ने दिन-रात मेहनत कर इस जटिल कार्य को पूरा किया और लंबे समय से लंबित मामले का समाधान निकाला। तीन दशक पुराने रिकॉर्ड खोजना बड़ी चुनौती प्रशासन के अनुसार यह कार्य आसान नहीं था क्योंकि कई रिकॉर्ड 30 वर्ष से अधिक पुराने थे। वरिष्ठता सूची, सेवा विवरण, पात्रता शर्तें, भर्ती नियम और पुराने पदोन्नति रिकॉर्ड की दोबारा जांच करनी पड़ी। कई दस्तावेज अलग-अलग विभागों में बिखरे हुए थे, जिन्हें एकत्र कर सत्यापित किया गया। विशेष सेल ने विभिन्न विभागों के साथ समन्वय कर पूरे डेटा का पुनर्निर्माण किया और तय समय में प्रक्रिया पूरी की।



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