चंडीगढ़ के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (जीएमसीएच) सेक्टर-32 में मंगलवार रात एक एमबीबीएस चौथे वर्ष के 23 वर्षीय छात्र करण सिंह संधू ने अस्पताल के ई-ब्लॉक स्थित लाइब्रेरी की छठी मंजिल से छलांग लगाकर जान दे दी। घटना से पहले उसने अपने करीबी दोस्तों को एक-एक कर ‘गुडबाय’ का संदेश भेजा था। दोस्तों ने तुरंत फोन किए, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी में रखवा दिया है। बुधवार को पोस्टमार्टम किया जाएगा। इसके बाद शव परिजनों को सौंपा जाएगा। पुलिस मोबाइल फोन, मैसेज, कॉल डिटेल और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। वहीं अस्पताल प्रशासन ने भी अपने स्तर पर पूरे मामले की जांच शुरू करने का फैसला लिया है। प्रशासन यह पता लगाएगा कि आखिर मेडिकल छात्रों और डॉक्टरों में बढ़ते तनाव और आत्महत्या जैसी घटनाओं के पीछे क्या कारण हैं और भविष्य में इन्हें रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि करण पिछले कुछ समय से मानसिक तनाव और पढ़ाई के दबाव से गुजर रहा था। पुलिस को परिजनों और दोस्तों ने बताया कि कुछ दिन पहले उसने अपनी मां से मेडिकल की पढ़ाई छोड़ने की इच्छा जताई थी। हालांकि पुलिस का कहना है कि आत्महत्या के वास्तविक कारणों का खुलासा जांच पूरी होने के बाद ही होगा। लाइब्रेरी का बोलकर गया नहीं लौटा करण सिंह संधू सेक्टर-32डी का रहने वाला था। उसके पिता डॉ. सरबजीत सिंह और माता डॉ. नवरीत संधू सेक्टर-35 में डेंटल क्लीनिक चलाते हैं। मंगलवार शाम करीब सात बजे करण घर से यह कहकर निकला था कि वह लाइब्रेरी जा रहा है और रात नौ बजे तक वापस आ जाएगा। अस्पताल पहुंचने के बाद वह सीधे ई-ब्लॉक की छठी मंजिल स्थित लाइब्रेरी गया। वहां जाने से पहले उसने सुरक्षा गार्ड से बात की। रात करीब 8:20 बजे उसने अपने दोस्तों को ‘गुडबाय’ का संदेश भेजा और करीब दस मिनट बाद यह कदम उठा लिया। मैसेज मिलते ही दोस्तों के होश उड़ गए। सभी ने तुरंत करण के मोबाइल पर कॉल करना शुरू किया, लेकिन उसने फोन नहीं उठाया। अनहोनी की आशंका के चलते दोस्तों ने उसके परिजनों को सूचना दी और अस्पताल पहुंचे। मोबाइल और डिजिटल साक्ष्यों की होगी जांच पुलिस ने करण का मोबाइल फोन कब्जे में ले लिया है। उसके मैसेज, कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है। अस्पताल की डायरेक्टर-प्रिंसिपल डॉ. रवनीत कौर भी देर रात मौके पर पहुंचीं। डीएसपी गुरजीत कौर ने परिजनों और दोस्तों के बयान दर्ज किए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फोरेंसिक जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस के अनुसार करण अपनी कार अस्पताल की पार्किंग में छोड़ गया था। घटना के बाद दोस्तों ने कार की चाबी पुलिस को सौंपी। जांच में यह भी सामने आया है कि अस्पताल आने से पहले उसने अपने घर की खिड़की पर भी कुछ लिखा था। पुलिस उस पहलू की भी जांच कर रही है। दो माह पहले भी जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर की मौत करीब दो महीने पहले भी जीएमसीएच-32 में एक जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। 24 वर्षीय डॉ. योगेश, जो जनरल मेडिसिन विभाग में कार्यरत थे, अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर के शौचालय में बेसुध मिले थे। काफी देर तक बाहर नहीं आने पर साथियों ने दरवाजा तोड़ा था। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। घटनास्थल से पोटेशियम क्लोराइड के इंजेक्शन मिलने के बाद थाना-34 पुलिस और फोरेंसिक टीम ने जांच शुरू की थी।
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