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चंडीगढ़ में जज की ID से 700 चालान क्लियर:इंटरनल जांच में दोषी करार, किया अहलमद बर्खास्त, परिवार सहित अंडरग्राउंड




चंडीगढ़ डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में जज की ID से 700 ट्रैफिक चालान भुगतान घोटाले के मुख्य आरोपी अहलमद विशाल को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। इंटरनल जांच में उसे पद का दुरुपयोग करने, सरकारी रिकॉर्ड में हेराफेरी करने और सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने का दोषी पाया गया। जांच रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट प्रशासन ने यह कार्रवाई की। जांच के दौरान विशाल को शोकॉज नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया था। कोर्ट की ओर से कर्मचारी उसके खरड़ स्थित पते पर भी भेजा गया, लेकिन वह वहां नहीं मिला। बाद में अदालत ने अखबार में सार्वजनिक नोटिस प्रकाशित कर सात दिन के भीतर पेश होने के निर्देश दिए। निर्धारित समय बीत जाने के बावजूद वह सामने नहीं आया, जिसके बाद उसे नौकरी से हटा दिया गया। जानकारी के अनुसार आरोपी लंबे समय से परिवार सहित अंडरग्राउंड है। एक फोन कॉल से खुली गड़बड़ी की परतें मामले का खुलासा तब हुआ जब शहर के एक अधिकारी ने अपने ट्रैफिक चालान को लेकर एक जज को फोन किया। जज ने कहा कि चालान का भुगतान केवल तय प्रक्रिया के तहत ही हो सकता है। अगले दिन अधिकारी ने फिर फोन कर चालान निपट जाने की जानकारी दी। इसके बाद जज को शक हुआ और उन्होंने रिकॉर्ड की जांच करवाई, जिसमें गड़बड़ी सामने आई। अगले ही दिन अधिकारी ने जज को फोन कर चालान निपट जाने पर धन्यवाद दिया। यह सुनकर जज को संदेह हुआ और उन्होंने रिकॉर्ड की जांच करवाई। जांच में सामने आया कि बिना अनुमति चालान क्लियर किया गया था। इसके बाद मामले की गहन पड़ताल शुरू हुई, जिसने बड़े स्तर पर हुए घोटाले की पोल खोल दी। जानिए कैसे करता था आरोपी धोखाधड़ी डिस्ट्रिक्ट कोर्ट की जांच में सामने आया कि करीब 700 ट्रैफिक चालानों का भुगतान रिकॉर्ड में दिखाया गया, लेकिन उनकी राशि सरकारी खजाने में जमा नहीं करवाई गई। इतना ही नहीं, कंप्यूटर सिस्टम से कई एंट्रियों और संबंधित डिटेल को भी हटाने की कोशिश की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (सीजेएम) ने कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद सेक्टर-36 थाना पुलिस ने अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ धोखाधड़ी समेत विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया। जांच में सामने आई आईडी की भूमिका कोर्ट ने गुप्त रूप से साइबर सेल की मदद से पता करवाया कि संदिग्ध दिन किन कर्मचारियों की लॉगिन आईडी सक्रिय थीं। जांच के दौरान एक अहलमद की आईडी पर शक गहराया, क्योंकि उसी आईडी से संबंधित चालानों का भुगतान दिखाया गया था। घोटाले के सामने आने के बाद डिस्ट्रिक्ट कोर्ट प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए विभिन्न अदालतों में इस्तेमाल हो रही करीब 20 अहलमद आईडी बंद करवा दी। अब ट्रैफिक चालान से जुड़े कार्य सीमित और अधिक निगरानी वाले सिस्टम के माध्यम से किए जा रहे हैं।



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