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चंडीगढ़ में कैब ड्राइवरों को पुलिस ने उठाया:चौक पर धरना देने जा रहे थे, प्रशासन के खिलाफ की नारेबाजी; मांगें पूरी न होने तक आंदोलन




चंडीगढ़ में अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे कैब ड्राइवर सोमवार को सेक्टर-17/16 चौक पर प्रदर्शन करने जा रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक लिया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें बसों में बैठाकर सेक्टर-25 रैली ग्राउंड पहुंचा दिया। इस दौरान ड्राइवरों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी मांगों को लेकर विरोध जताया। बाद में सेक्टर-25 रैली ग्राउंड में कैब ड्राइवरों ने प्रशासन के खिलाफ प्रतीकात्मक अर्थी निकालकर प्रदर्शन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर धरना देने के बावजूद प्रशासन उनकी समस्याओं की अनदेखी कर रहा है। कई दिनों से चल रहा धरना, फिर भी नहीं हुई सुनवाई कैब ड्राइवर यूनियन के प्रधान अमनदीप सिंह ने बताया कि यूनियन पिछले कई दिनों से सेक्टर-25 रैली ग्राउंड में शांतिपूर्ण धरना दे रही है। कई बार प्रशासन के अधिकारियों के सामने अपनी मांगें रखी गईं, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला। इसी कारण सोमवार को सभी चालक अपनी आवाज प्रशासन तक पहुंचाने के लिए सेक्टर-17/16 चौक पर प्रदर्शन करने जा रहे थे, लेकिन पुलिस ने रास्ते में ही रोककर बसों में बैठा लिया। उन्होंने कहा कि कैब ड्राइवर अपने हक और रोजी-रोटी की लड़ाई लड़ रहे हैं। उनकी मांगें पूरी तरह जायज हैं, लेकिन प्रशासन लगातार उन्हें नजरअंदाज कर रहा है। अमदीप सिंह ने बताया कि उनके आंदोलन को समर्थन देने के लिए चंडीगढ़ के मेयर सौरभ जोशी और पंजाब कांग्रेस के प्रधान राजा वड़िंग भी धरना स्थल पर आ चुके हैं। महंगाई और बढ़ते खर्च से बिगड़ी आर्थिक स्थिति प्रदर्शन में शामिल ड्राइवरों ने कहा कि लगातार बढ़ती महंगाई, डीजल-पेट्रोल और सीएनजी की कीमतों के साथ वाहन के रखरखाव का खर्च भी काफी बढ़ गया है। इसके बावजूद कैब किराए की दरों में लंबे समय से कोई संशोधन नहीं किया गया। ऐसे में परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा कि यदि जल्द किराया दरों में बढ़ोतरी और अन्य लंबित मांगों पर फैसला नहीं लिया गया तो बड़ी संख्या में कैब चालक आर्थिक संकट में आ जाएंगे। अब जानें कैब ड्राइवरों की प्रमुख मांगें: – 35 रुपए प्रति किलोमीटर किराये की मांग: प्रदर्शन कर रहे कैब ड्राइवरों की प्रमुख मांगों में किराया दरों में संशोधन शामिल है। उनका कहना है कि वर्तमान किराया दरें वर्षों पुरानी हैं और मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार पर्याप्त नहीं हैं। ड्राइवरों ने मांग की कि कैब का न्यूनतम किराया 35 रुपए प्रति किलोमीटर निर्धारित किया जाए। परिवार का खर्च चलाना कठिन हो गया: उनका कहना है कि वर्तमान में किराया 25 रुपए प्रति किलोमीटर है, जबकि सीएनजी के दाम करीब साढ़े 9 रुपए प्रति किलो बढ़ चुके हैं। ऐसे में वाहन की किस्त, बीमा, मेंटेनेंस, ईंधन और अन्य खर्चों को पूरा करना मुश्किल हो रहा है। मौजूदा किराया दरों पर काम करने से उनकी आय लगातार घट रही है और परिवार का खर्च चलाना कठिन हो गया है। महंगाई ने तोड़ दी कमर: कैब ड्राइवर यूनियन के अध्यक्ष अमनदीप ने कहा कि आज पेट्रोल और डीजल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। इसके अलावा वाहन के स्पेयर पार्ट्स, सर्विसिंग, बीमा और अन्य खर्चों में भी भारी वृद्धि हुई है। वहीं घरेलू जरूरतों का सामान भी पहले की तुलना में काफी महंगा हो चुका है। इन परिस्थितियों में वर्तमान किराया दरों पर काम करना घाटे का सौदा बन गया है। कई ड्राइवर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं और कुछ को तो वाहन की किस्तें चुकाने में भी परेशानी हो रही है। किराया दरों में बढ़ोतरी करनी चाहिए: अमनदीप ने कहा कि हम दिन-रात मेहनत कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। प्रशासन को हमारी समस्याओं को समझते हुए किराया दरों में बढ़ोतरी करनी चाहिए। एप कंपनियों पर लगाए गंभीर आरोप प्रदर्शन के दौरान कैब ड्राइवरों ने विभिन्न ऐप आधारित कंपनियों पर भी आरोप लगाए। उनका कहना है कि शहर में सफेद नंबर प्लेट वाले निजी वाहनों को व्यावसायिक कैब सेवा के रूप में चलाया जा रहा है, जो नियमों के खिलाफ है। ड्राइवरों का आरोप है कि ऐसे वाहनों के कारण वैध कमर्शियल कैब ड्राइवरों का रोजगार प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि व्यावसायिक परमिट, टैक्स और अन्य नियमों का पालन करने वाले ड्राइवरों को नुकसान उठाना पड़ रहा है, जबकि निजी वाहन मालिक बिना निर्धारित नियमों का पालन किए कैब सेवा चला रहे हैं।



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