spot_imgspot_img

Top 5 This Week

spot_img

Related Posts

चंडीगढ़ मास्टर प्लान-2031विवाद:30 मीटर ऊंची इमारतों और ज्यादा FAR के प्रस्ताव का विरोध, 100 से ज्यादा आपत्तियां प्रशासन को मिलीं




चंडीगढ़ मास्टर प्लान-2031 में प्रस्तावित संशोधनों को लेकर शहर में विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। जनसुनवाई से पहले रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशनों (RWA), आर्किटेक्ट्स, शहरी योजनाकारों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने प्रशासन के पास 100 से अधिक आपत्तियां और सुझाव दर्ज कराए हैं। लोगों का कहना है कि प्रस्तावित बदलाव शहर की पहचान, बुनियादी ढांचे और पर्यावरण पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं। प्रशासन की ओर से गठित स्क्रीनिंग कमेटी 25 से 28 जून तक जनसुनवाई करेगी, जिसमें आपत्ति दर्ज कराने वाले लोग अपना पक्ष रख सकेंगे। बुनियादी सुविधाओं पर बढ़ेगा दबाव आपत्ति जताने वालों का कहना है कि शहर की पानी, बिजली, सीवरेज और ड्रेनेज व्यवस्था पहले से ही दबाव में है। यदि आबादी का घनत्व बढ़ाया गया और अतिरिक्त निर्माण की अनुमति दी गई तो मौजूदा सुविधाओं पर और अधिक बोझ पड़ेगा। इससे भविष्य में नागरिक सुविधाओं पर संकट खड़ा हो सकता है। ट्रैफिक और पार्किंग की समस्या बढ़ने का डर फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) बढ़ाने और अधिक निर्माण की अनुमति मिलने से वाहनों की संख्या भी बढ़ेगी। लोगों का कहना है कि इससे ट्रैफिक जाम और पार्किंग की समस्या और गंभीर हो जाएगी। कई क्षेत्रों में पहले ही पार्किंग के लिए पर्याप्त जगह नहीं है। 30 मीटर ऊंची इमारतों के प्रस्ताव पर आपत्ति मास्टर प्लान में कुछ क्षेत्रों में 30 मीटर तक ऊंची इमारतों की अनुमति देने का प्रस्ताव है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह चंडीगढ़ के मूल नियोजन सिद्धांतों के खिलाफ है। उनका कहना है कि शहर को कम घनत्व और खुले वातावरण वाले मॉडल के रूप में विकसित किया गया था, जबकि ऊंची इमारतें इस स्वरूप को बदल देंगी। हेरिटेज और स्काईलाइन पर असर की चिंता विरोध करने वालों का कहना है कि ऊंची इमारतों से शहर की स्काईलाइन प्रभावित होगी और शिवालिक पहाड़ियों का प्राकृतिक दृश्य बाधित हो सकता है। साथ ही, विश्व धरोहर शहर के रूप में चंडीगढ़ की पहचान पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। पर्यावरण और सुरक्षा को लेकर भी सवाल चंडीगढ़ भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील सिस्मिक जोन-4 में आता है। ऐसे में हाईराइज इमारतों को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताएं सामने आई हैं। इसके अलावा हरित क्षेत्र और खुली जगहें कम होने से तापमान बढ़ने तथा पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित होने की आशंका भी जताई गई है। 21 दिन का समय बताया कम कई संगठनों ने आपत्तियां दर्ज कराने के लिए दिए गए 21 दिनों के समय को भी अपर्याप्त बताया है। उनका कहना है कि इतने महत्वपूर्ण विषय पर लोगों को विस्तृत सुझाव देने और दस्तावेजों का अध्ययन करने के लिए अधिक समय मिलना चाहिए था। 25 जून से शुरू होगी जनसुनवाई इंजीनियरिंग सचिव प्रेमा पुरी की अध्यक्षता वाली 9 सदस्यीय स्क्रीनिंग कमेटी 25 जून से 28 जून तक जनसुनवाई करेगी। इसके बाद कमेटी अपनी रिपोर्ट प्रशासन को सौंपेगी, जिसके आधार पर मास्टर प्लान-2031 में संशोधनों पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। शहर के विभिन्न संगठनों का कहना है कि विकास जरूरी है, लेकिन चंडीगढ़ की मूल पहचान, हरित स्वरूप और नियोजित ढांचे से समझौता नहीं किया जाना चाहिए। अब सभी की निगाहें जनसुनवाई और प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।



Source link

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

Popular Articles