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चंडीगढ़ मंडी में सिक्योरिटी जमा कराने की शर्त खत्म:व्यापारियों को मिली बड़ी राहत; अब 3 की जगह 10 साल के लिए लाइसेंस वैध




चंडीगढ़ की मंडियों में कारोबार करने वाले व्यापारियों के लिए बड़ी राहत की खबर है। यूटी प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने स्टेट एग्रीकल्चरल मार्केटिंग बोर्ड के सुधार प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके तहत अब मंडी लाइसेंस लेने के लिए व्यापारियों को बैंक गारंटी या कैश सिक्योरिटी जमा नहीं करानी होगी। इसके साथ ही लाइसेंस की वैधता अवधि 3 साल से बढ़ाकर 10 साल कर दी गई है। प्रशासक की मंजूरी के बाद पंजाब एग्रीकल्चरल प्रोड्यूस मार्केट रूल्स, 1962 के नियम 17 और 21 में संशोधन लागू कर दिया गया है। यह बदलाव पंजाब मंडी बोर्ड की तर्ज पर किया गया है। व्यापार शुरू करना होगा आसान नए नियमों के तहत मंडी लाइसेंस के लिए आवेदन करने वाले कारोबारियों को अब किसी प्रकार की वित्तीय सिक्योरिटी जमा नहीं करनी पड़ेगी। इससे व्यापार शुरू करने में आने वाली शुरुआती आर्थिक बाधाएं कम होंगी और छोटे व नए कारोबारियों को भी राहत मिलेगी। मार्केटिंग बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि इस फैसले से लाइसेंसिंग प्रक्रिया अधिक सरल, पारदर्शी और कारोबारी-अनुकूल बनेगी। लाइसेंस नवीनीकरण का झंझट भी खत्म पहले मंडी लाइसेंस की वैधता केवल 3 वर्ष होती थी, जिसके बाद कारोबारियों को नवीनीकरण के लिए प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था। अब लाइसेंस सीधे 10 वर्षों तक वैध रहेगा। इससे व्यापारियों को बार-बार दफ्तरों के चक्कर लगाने और कागजी कार्रवाई से राहत मिलेगी। कृषि व्यापार को मिलेगा बढ़ावा स्टेट एग्रीकल्चरल मार्केटिंग बोर्ड का मानना है कि नए नियमों से चंडीगढ़ की रेगुलेटेड मंडियों में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और अधिक कारोबारी कृषि व्यापार से जुड़ सकेंगे। विभाग के अनुसार यह कदम ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने और कृषि विपणन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में उठाया गया है। अधिकारियों का कहना है कि प्रशासनिक औपचारिकताएं कम होने से न केवल मौजूदा व्यापारियों को लाभ होगा, बल्कि युवा और नए उद्यमियों के लिए भी कृषि कारोबार के क्षेत्र में अवसर बढ़ेंगे।



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