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चंडीगढ़ प्रशासन ने पिछले बजट का 99% किया यूज:विकास कार्यों के लिए नए फंड का इंतजार, पुलिस विभाग पर सबसे ज्यादा ₹999.12 करोड़ खर्च




चंडीगढ़ प्रशासन ने अपने पिछले 2025-26 के बजट का लगभग 99% खर्च कर दिया है, जिस कारण प्रशासन के पास अब विकास कार्यों के लिए पैसा नहीं बचा है। अगले बजट से मिलने वाले पैसे का इंतजार किया जा रहा है। प्रशासन को करीब 6465.77 करोड़ रुपए मिले थे, जिसमें से 6402.82 करोड़ रुपए खर्च कर दिए गए हैं। शुरुआत में केंद्र सरकार ने चंडीगढ़ के लिए 6983.18 करोड़ रुपए का बजट तय किया था, लेकिन बाद में इसे घटाकर 6465.77 करोड़ रुपए कर दिया गया था। पुलिस विभाग पर लगा सबसे ज्यादा बजट प्रशासन की तरफ से जारी किए गए डेटा के अनुसार शहर में सबसे ज्यादा खर्च चंडीगढ़ पुलिस पर हुआ है। पुलिस विभाग ने करीब 999.12 करोड़ रुपए खर्च किए हैं, जो सभी विभागों से ज्यादा है। इसके अलावा नगर निगम ने 775 करोड़ रुपए, स्कूल शिक्षा पर 684 करोड़ रुपए, इंजीनियरिंग विभाग पर 657 करोड़ रुपए, गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज पर 602 करोड़ रुपए, चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट पर 468 करोड़ रुपए, हायर एजुकेशन पर 279 करोड़ रुपए, हेल्थ विभाग पर 268 करोड़ रुपए और टेक्निकल एजुकेशन पर 107 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। कैपिटल एवं रेवेन्यू खर्च इस तरह रहा कैपिटल कार्यों पर प्रशासन ने 547 करोड़ रुपए में से 530.11 करोड़ रुपए यानी करीब 97% खर्च किए हैं। इसमें सबसे ज्यादा पैसा बिल्डिंग और ढांचे बनाने पर लगा है। वहीं रेवेन्यू खर्च में 5918.77 करोड़ के मुकाबले 5872.71 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं, जो करीब 99.2 प्रतिशत है। रेवेन्यू खर्च में सैलरी पर हुआ सबसे ज्यादा खर्च अगर रेवेन्यू खर्च की बात करें तो इसमें सैलरी पर सबसे ज्यादा खर्च किया गया है। इसमें 1600.3 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। वहीं भत्तों पर 1359.51 करोड़ रुपए, ग्रांट-इन-एड पर 951.81 करोड़ रुपए, मजदूरी पर 663.7 करोड़ रुपए और सामान व सप्लाई पर 334.12 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं।



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