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कुरुक्षेत्र जिले के लाडवा में एक 29 वर्षीय विवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगे हैं। मृतका के परिजनों का कहना है कि बेटी की हालत लगातार बिगड़ती रही, लेकिन उसे समय पर अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक कराने ले गए। जब हालत बेहद नाजुक हो गई तब अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिजनों का आरोप है कि अगर समय रहते इलाज कराया जाता तो उसकी जान बच सकती थी। मृतका की पहचान रजनी निवासी लाडवा के रूप में हुई है। उसकी शादी करीब साढ़े तीन साल पहले जोगिंद्र उर्फ जगीर के साथ हुई थी। तीन महीने पहले ही रजनी ने सिजेरियन डिलीवरी (ऑपरेशन द्वारा) से एक बेटी को जन्म दिया था। डॉक्टर ने आराम की सलाह दी, घर का काम कराया मृतका की मां बाला देवी निवासी खेड़ी मारकंडा ने आरोप लगाया कि कि ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों ने रजनी को लंबे समय तक आराम करने की सलाह दी थी, लेकिन ससुराल वालों ने मात्र एक सप्ताह बाद ही उससे घर का सारा काम करवाना शुरू कर दिया। आरोप है कि अधिक मेहनत कराने से ऑपरेशन के टांकों में इन्फेक्शन हो गया। तबीयत बिगड़ने पर फोन आया, गोद में तोड़ा दम बाला देवी ने बताया कि आज सोमवार को ससुराल से फोन आया कि रजनी की तबीयत ज्यादा खराब है और आकर देख जाएं। सूचना मिलने पर वह परिवार के अन्य लोगों के साथ बेटी के घर पहुंचीं। वहां रजनी बिस्तर पर बेसुध पड़ी थी और बहुत धीमी सांसें ले रही थी। मां के अनुसार उन्होंने बेटी को अपनी गोद में लिया, उसने एक अंतिम सांस ली और फिर कोई हलचल नहीं हुई। मृत हालत में भी झाड़-फूंक कराने ले गए परिजनों का आरोप है कि बेटी की हालत गंभीर होने के बावजूद ससुराल वाले उसे अस्पताल ले जाने की बजाय झाड़-फूंक कराने वाले के पास ले गए। वहां मौजूद व्यक्ति ने भी उसकी हालत देखकर तुरंत डॉक्टर के पास ले जाने की सलाह दी। इसके बाद उसे लाडवा के सिविल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पहले भी करती थी प्रताड़ना की शिकायत मां का आरोप है कि रजनी पहले भी कई बार पति जोगिंद्र उर्फ जगीर, सास तथा परिवार के अन्य सदस्य द्वारा मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना दिए जाने की बात बता चुकी थी। वह कहती थी कि उसे भरपेट भोजन नहीं दिया जाता, घर से बाहर निकाल दिया जाता। पति, सास व देवर उसके साथ मारपीट करते थे। मरने से पहले छोटी बहन को फोन किया परिजनों के अनुसार, मौत से एक दिन पहले रविवार को रजनी ने अपनी छोटी बहन श्वेता को फोन किया था। उसने बताया था कि ससुराल वालों ने उसे कुछ टीके लगवाए हैं, जिसके बाद उसकी तबीयत लगातार खराब हो रही है। रजनी 5 बहनों में चौथे नंबर पर थी। उसका भाई मोहित इन दिनों दुबई में है। घटना की जानकारी मिलने के बाद उसने अपने एक दोस्त को घर भेजा। रजनी के पिता विनोद एक निजी कंपनी में काम करते हैं। इलाज में लापरवाही, अंधविश्वास में जान गई परिवार का कहना है कि जब घर के सभी सदस्य मौजूद थे तो रजनी को समय रहते अस्पताल क्यों नहीं ले जाया गया। उनका आरोप है कि इलाज में लापरवाही और अंधविश्वास के कारण उनकी बेटी की जान चली गई। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। जांच अधिकारी बोले- रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई होगी लाडवा थाना प्रभारी राजीव कुमार ने बताया कि शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया गया है। फिलहाल मृतका की मां के बयान के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी गई है। मौत के वास्तविक कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चल सकेगा। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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