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कार के ओवरटेक को लेकर हुए विवाद में किया मर्डर:मोहाली अदालत ने तीन काे उम्रकैद की सजा सुनाई, चौथा सबूतों के अभाव में बरी




मोहाली के जीरकपुर में छह साल पहले कार के ओवरटेक को लेकर हुए विवाद में कुलदीप सिंह नाम के व्यक्ति की बेरहमी से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में मोहाली जिला अदालत ने तीन लोगों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। इनमें गुरविंदर सिंह, सुखविंदर सिंह और परविंदर सिंह (सभी निवासी गांव सनौली, जीरकपुर) शामिल हैं। मामले के चौथे आरोपी के रूप में समन किए गए मनिंदर सिंह उर्फ मिंटू को अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए पूरी तरह बरी कर दिया। फैसले का विस्तृत आदेश (डिटेल ऑर्डर) भी आ गया है। अब पूरे मामले को जानिए। अब 5 प्वाइंट में जानिए कैसे हुआ विवाद 1. ओवरटेक और आंखें मिलने पर शुरू हुआ विवाद
30 जून 2019 को पवन सरोहा अपने दोस्तों कुलदीप सिंह और निपुण जैन के साथ पंचकूला से जीरकपुर जा रहे थे। सनौली लिंक रोड पर पीछे से आ रही फोर्ड फिगो सवारों से ओवरटेक और आंखें मिलने की बात पर कहासुनी हो गई। 2. कार रुकवाकर कुलदीप पर किया हमला
आरोपियों ने अपनी कार आगे लगाकर स्कोडा रुकवा ली। इसके बाद कुलदीप सिंह को निशाना बनाते हुए उस पर लात-घूंसों से हमला कर दिया। बचाने आए पवन और निपुण के साथ भी मारपीट की गई। 3. अस्पताल पहुंचने से पहले चली गई जान
हमले के बाद कुलदीप बेहोश हो गया। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू की। 4. मेडिकल रिपोर्ट ने खोली मौत की वजह
पोस्टमार्टम में कई पसलियां टूटी मिलीं। लीवर और तिल्ली फट चुके थे और पेट के अंदर ज्यादा खून बहने से मौत होने की पुष्टि हुई। जांच में आरोपियों के घरों से बरामद जूतों को भी अहम साक्ष्य माना गया। 5. पोस्टमार्टम में 6 पसलियां टूटी मिलीं
आरोपियों ने एफआईआर में देरी, सीसीटीवी फुटेज नहीं होने और मृतक की पहले से बीमारी होने का हवाला दिया। लेकिन अदालत ने कहा कि चश्मदीद गवाहों के बयान और मेडिकल रिपोर्ट पूरी तरह एक-दूसरे की पुष्टि करते हैं। पोस्टमार्टम में खुलासा हुआ कि कुलदीप सिंह की छह पसलियां टूट गई थीं और लीवर व तिल्ली फटने से पेट के अंदर अत्यधिक खून बह गया, जिससे उसकी मौत हो गई।
चौथा आरोपी इन 5 वजहों से बरी हुआ 1. शुरुआत में FIR में था नाम
30 जून 2019 को दर्ज एफआईआर में मनिंदर सिंह उर्फ मिंटू को भी गुरविंदर, सुखविंदर और परविंदर सिंह के साथ आरोपी बनाया गया था। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि वह भी फोर्ड फिगो में सवार था। 2. पुलिस जांच में बदली तस्वीर
मामले की आगे की जांच के दौरान पुलिस ने पूरक चालान दाखिल किया। इसमें सामने आया कि मनिंदर सिंह के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं मिले। 3. मोबाइल लोकेशन बनी सबसे बड़ा सबूत
साइबर सेल की रिपोर्ट और मोबाइल टॉवर लोकेशन से पता चला कि घटना के समय मनिंदर सिंह का मोबाइल घटनास्थल के आसपास नहीं था। तकनीकी साक्ष्यों के मुताबिक वह किसी दूसरे स्थान पर मौजूद था। 4. गवाह भी मौजूदगी साबित नहीं कर सके
कोर्ट में गवाही के दौरान किसी भी प्रत्यक्षदर्शी ने यह साफ तौर पर साबित नहीं किया कि मनिंदर सिंह मौके पर मौजूद था या उसने मारपीट में हिस्सा लिया था। 5. कोर्ट ने संदेह का लाभ दिया
तकनीकी साक्ष्यों और गवाहों के बयानों में उसकी भूमिका साबित नहीं होने पर अदालत ने मनिंदर सिंह को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। जबकि बाकी तीन आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत मिलने पर उन्हें दोषी ठहराया गया।



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