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कार्यस्थल पर महिला सुरक्षा को लेकर सोनीपत डीसी सख्त:बोलीं-यौन उत्पीड़न पर होगी सख्त कार्रवाई, 3 माह के भीतर दर्ज कर सकती हैं शिकायत




सोनीपत डीसी नेहा सिंह ने कहा कि जिले में प्रत्येक महिला को सुरक्षित, सम्मानजनक और भयमुक्त कार्यस्थल उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने जोर दिया कि कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ किसी भी प्रकार का यौन उत्पीड़न न केवल कानूनी अपराध है, बल्कि यह उनके सम्मान और अधिकारों का भी उल्लंघन है। डीसी ने बताया कि यौन उत्पीड़न (रोकथाम, प्रतिषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम-2013 महिलाओं को सुरक्षित कार्य वातावरण प्रदान करने के उद्देश्य से लागू किया गया है। उन्होंने सभी सरकारी और निजी संस्थानों से इस अधिनियम का गंभीरता से पालन करने का आह्वान किया। ‘कार्यरत महिलाओं पर समान रूप से लागू होता है अधिनियम’ नेहा सिंह ने स्पष्ट किया कि यह अधिनियम केवल नियमित महिला कर्मचारियों पर ही नहीं, बल्कि संविदा कर्मियों, प्रशिक्षुओं (इंटर्न), प्रशिक्षणार्थियों, परामर्शदाताओं, स्वयंसेवकों और घरेलू कामगारों सहित किसी भी प्रकार की कार्य व्यवस्था में कार्यरत महिलाओं पर समान रूप से लागू होता है। उन्होंने बताया कि कार्यस्थल पर बिना सहमति के किया गया अनुचित स्पर्श, यौन संबंधी मांग, अश्लील टिप्पणी, अभद्र संदेश, ई-मेल या सोशल मीडिया के माध्यम से आपत्तिजनक सामग्री भेजना, ये सभी यौन उत्पीड़न की श्रेणी में आते हैं और कानून के तहत दंडनीय अपराध हैं। ‘उल्लंघन करने पर होगी कार्रवाई’ डीसी ने महिलाओं के अधिकारों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रत्येक महिला को सुरक्षित एवं सम्मानजनक कार्यस्थल का अधिकार, शिकायत दर्ज कराने का अधिकार, गोपनीयता बनाए रखने का अधिकार और निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच का अधिकार प्राप्त है। अधिनियम की धारा-16 के तहत शिकायतकर्ता, प्रतिवादी, गवाहों और जांच से संबंधित समस्त जानकारी को पूर्णतः गोपनीय रखना अनिवार्य है। उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी प्रकार के उल्लंघन की स्थिति में संबंधित व्यक्ति अथवा संस्था के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। ‘जागरूकता एवं संवेदनशीलता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं’ डीसी ने सभी सरकारी विभागों, बोर्डों, निगमों, शैक्षणिक संस्थानों और निजी प्रतिष्ठानों को निर्देश दिए कि जहां 10 या उससे अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं। वहां आंतरिक शिकायत समिति का गठन अनिवार्य रूप से किया जाए और समिति में एक बाह्य सदस्य को भी शामिल किया जाए। उन्होंने कहा कि समय-समय पर कर्मचारियों के लिए जागरूकता एवं संवेदनशीलता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। ताकि कार्यस्थल पर महिलाओं के प्रति सम्मानजनक वातावरण विकसित हो सके। ‘घटना के 3 माह के भीतर दर्ज की जा सकती है शिकायत’ उन्होंने बताया कि पीडि़त महिला अपनी शिकायत संबंधित संस्थान की आंतरिक शिकायत समिति, जिला स्तर पर गठित स्थानीय समिति, अधिसूचित नोडल अधिकारी अथवा केंद्र सरकार के ऑनलाइन पोर्टल www.shebox.nic.in के माध्यम से भी दर्ज करवा सकती है। शिकायत घटना के 3 माह के भीतर दर्ज की जा सकती है और आवश्यक परिस्थितियों में निर्धारित नियमों के अनुसार समयावधि बढ़ाई भी जा सकती है। डीसी ने कहा कि महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित करना केवल प्रशासन ही नहीं बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने सभी संस्थानों से अधिनियम के प्रावधानों का पालन करने और ऐसा सुरक्षित एवं सकारात्मक कार्य वातावरण विकसित करने का आह्वान किया, जहां प्रत्येक महिला बिना किसी भय, भेदभाव और उत्पीडऩ के अपने दायित्वों का निर्वहन कर सके।



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