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करनाल में शिक्षा मंत्री का विपक्ष पर हमला:बोले- आंदोलन को भटकाने की हुई कोशिश, नई शिक्षा नीति का असर अब दिखेगा




करनाल के गवर्नमेंट कॉलेज में आयोजित सम्मान सम्मेलन में प्रदेशभर से पहुंचे लेक्चररों के बीच शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने शिक्षकों की समस्याओं के समाधान का भरोसा दिलाया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षक शामिल हुए, जहां उनकी मांगों और मुद्दों को विस्तार से सुना गया। मंत्री ने कहा कि सरकार शिक्षकों की परेशानियों को गंभीरता से ले रही है और जल्द समाधान की दिशा में काम किया जाएगा, ताकि शिक्षा व्यवस्था और मजबूत हो सके। हरियाणा लेक्चरर्स एसोसिएशन द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे। उन्होंने मंच से शिक्षकों को सम्मानित किया और उनके योगदान की सराहना की। कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने शिक्षा व्यवस्था के साथ-साथ प्रदेश और देश की राजनीति से जुड़े कई मुद्दों पर अपनी बात रखी। लेक्चररों की समस्याओं पर सरकार गंभीर शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने कहा कि इस सम्मेलन में हरियाणा के हजारों लेक्चरर पहुंचे हैं और उन्होंने अपनी विभिन्न समस्याओं से सरकार को अवगत कराया है। सरकार इन मुद्दों पर गंभीरता से काम कर रही है और प्रयास रहेगा कि जल्द से जल्द समाधान निकाला जाए। उन्होंने कहा कि शिक्षक बिना किसी बाधा के विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण में अपनी भूमिका निभा सकें, यह सरकार की प्राथमिकता है। युवा आंदोलन पर विपक्ष को घेरा युवा आंदोलन और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर उठे सवालों पर महिपाल ढांडा ने विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कुछ राजनीतिक दल पूरे मामले को केवल राजनीतिक नजरिए से देख रहे हैं। आंदोलन का मकसद छात्रों की समस्याओं का समाधान होना चाहिए था, न कि सरकार पर दबाव बनाना। उन्होंने कहा कि जब यह महसूस हुआ कि कुछ राष्ट्रविरोधी ताकतें इस आंदोलन का फायदा उठाने की कोशिश कर रही हैं और युवाओं को गुमराह किया जा सकता है, तब बड़ा फैसला लिया गया और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसे राजनीतिक जीत या हार के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार राहुल गांधी द्वारा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लिखे गए पत्र और युवाओं पर कथित लाठीचार्ज के मुद्दे पर शिक्षा मंत्री ने कांग्रेस को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अपने इतिहास पर नजर डालनी चाहिए। उन्होंने इमरजेंसी का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय लोकतंत्र का गला घोंटा गया था और विपक्षी नेताओं को जेलों में डाला गया था। इसके अलावा नसबंदी अभियान का भी उल्लेख करते हुए उन्होंने कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए। महिपाल ढांडा ने कहा कि भाजपा ने हमेशा जनसंख्या को देश की ताकत के रूप में देखा है, न कि बोझ के रूप में। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के बदलाव पर टिप्पणी केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त कार्यभार प्रहलाद जोशी को दिए जाने पर महिपाल ढांडा ने कहा कि वे एक अनुभवी मंत्री हैं और इस जिम्मेदारी को अच्छी तरह निभाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि धर्मेंद्र प्रधान के अनुभव पर सवाल नहीं उठाया जा सकता। उन्होंने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि परीक्षाएं किसी मंत्री द्वारा नहीं बल्कि संबंधित एजेंसियों द्वारा कराई जाती हैं, ऐसे में हर घटना के लिए मंत्री को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। आंदोलन को भटकाने की कोशिश का आरोप शिक्षा मंत्री ने आरोप लगाया कि कुछ लोग छात्रों के आंदोलन की आड़ में देश का माहौल खराब करना चाहते थे। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियों ने ऐसे लोगों की पहचान की है जो पेशेवर तरीके से आंदोलन को हिंसक दिशा देने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के बयान का भी जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने भी माना था कि आंदोलन गलत दिशा में जा रहा था और घटनाओं की निंदा की थी। एसआईआर से चुनाव प्रक्रिया होगी पारदर्शी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) को लेकर पूछे गए सवाल पर शिक्षा मंत्री ने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए यह जरूरी है कि हर योग्य नागरिक का नाम मतदाता सूची में हो और किसी अयोग्य व्यक्ति का नाम उसमें शामिल न हो। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया से फर्जी वोटों पर रोक लगेगी और चुनाव प्रणाली अधिक पारदर्शी बनेगी। नई शिक्षा नीति लागू, अब दिखेगा असर नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लेकर महिपाल ढांडा ने कहा कि सरकार ने वर्ष 2025 तक इसे पूरी तरह लागू करने का लक्ष्य रखा था, जिसे पूरा कर लिया गया है। अब इसका असर धीरे-धीरे शिक्षा व्यवस्था में दिखने लगेगा। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य बच्चों को गुणवत्तापूर्ण, आधुनिक और रोजगारोन्मुख शिक्षा उपलब्ध कराना है, ताकि वे भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हो सकें। शिक्षकों के सम्मान से बढ़ेगा मनोबल कार्यक्रम में पहुंचे शिक्षकों ने भी सरकार के सामने अपनी समस्याएं रखीं और उम्मीद जताई कि जल्द समाधान होगा। सम्मेलन में सम्मानित किए गए शिक्षकों ने कहा कि ऐसे आयोजनों से उनका मनोबल बढ़ता है और बेहतर कार्य करने की प्रेरणा मिलती है। कुल मिलाकर यह सम्मेलन शिक्षा से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ राजनीतिक बयानबाजी का भी मंच बना, जहां एक ओर शिक्षकों को राहत का भरोसा मिला, वहीं दूसरी ओर शिक्षा मंत्री ने विपक्ष पर जमकर निशाना साधा।



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