करनाल के एक निजी अस्पताल में भर्ती मरीज और डिस्चार्ज को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। परिजनों ने आरोप लगाया कि अस्पताल प्रबंधन ने लाखों रुपए का बिल बकाया होने के कारण मरीज को बंधक बना रखा था। शिकायत के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और मरीज को अस्पताल से बाहर ले आई। वहीं, अस्पताल मालिक ने आरोपों को झूठा बताते हुए कहा कि इलाज के पैसे न देने के लिए कहानी बनाई जा रही है। साथ ही पुलिस पर भी मरीज को जबरन ले जाने के आरोप लगाए। पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए जांच शुरू कर दी है। शिकायत के बाद पुलिस हरकत में आई चांद सराय निवासी शोभा देवी ने 25 जून को डीसी करनाल को शिकायत दी थी। शिकायत में बताया गया कि उनका बेटा सोनू 13 जून से प्रभु अस्पताल में भर्ती है। आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने दवाइयां बंद कर दीं और कहा कि 4 लाख 50 हजार रुपए जमा कराने पर ही मरीज को छुट्टी दी जाएगी। महिला ने खुद को गरीब बताते हुए कहा कि वह झाड़ू-पोछा का काम करके परिवार चलाती है और इतनी बड़ी रकम देना संभव नहीं है। महिला ने आर्थिक मजबूरी बताई शोभा देवी ने अपनी शिकायत में बताया कि उसका पति कई साल पहले छोड़कर चला गया और उसके पास दो बच्चे हैं, जिनमें एक बेटा विकलांग है। उसने पड़ोसियों से उधार लेकर अब तक 1 लाख 80 हजार रुपए इकट्ठे किए हैं और 80 हजार रुपए पहले ही अस्पताल को दे चुकी है। महिला ने गुहार लगाई कि वह कुल 1 लाख 80 हजार रुपए और देने को तैयार है, लेकिन अस्पताल प्रबंधन 4 लाख 50 हजार रुपए पर अड़ा हुआ है। थाने में मामला दर्ज, जांच शुरू डीसी कार्यालय से शिकायत सिविल लाइन थाना भेजी गई। इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी। गुरुवार को परिजन पुलिस के साथ अस्पताल पहुंचे और मरीज को अपने साथ ले गए। इस दौरान अस्पताल में काफी देर तक बहस की स्थिति बनी रही। अस्पताल मालिक ने लगाए गंभीर आरोप अस्पताल के मालिक रिंकू ने कहा कि पुलिस ने जबरन आईसीयू से मरीज को निकाला है। उनका कहना है कि जब मरीज को अस्पताल लाया गया था, तब उसकी हालत बेहद गंभीर थी और कई अस्पतालों से घूमने के बाद परिजन यहां पहुंचे थे। हालात को देखते हुए इलाज शुरू किया गया, लेकिन अब बिल चुकाए बिना ही मरीज को ले जाया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि इलाज का खर्च कौन देगा। पुलिस बोली-कानून के तहत की कार्रवाई सिविल लाइन थाना के एसएचओ विक्रांत ने बताया कि शोभा देवी की शिकायत मिली थी, जिसमें आरोप था कि उसके बेटे को अस्पताल में बंधक बनाकर रखा गया है। शिकायत डीसी कार्यालय के माध्यम से प्राप्त हुई थी। इसी आधार पर मामला दर्ज कर कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि किसी को जबरन डिस्चार्ज कराने जैसे आरोप सही नहीं हैं। मामले में दोनों पक्ष आमने-सामने इस पूरे मामले में एक तरफ जहां परिजन अस्पताल पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं, वहीं अस्पताल प्रबंधन खुद को सही ठहरा रहा है। पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल यह मामला शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है।
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करनाल में बिल न देने पर मरीज को बनाया बंधक:अस्पताल पहुंच पुलिस ने छुड़ाया, डीसी के आदेश पर कार्रवाई, मालिक बोला-बेबुनियाद आरोप
