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कनाडा के इमीग्रेशन डिपार्टमेंट ने बिल C-12 पास होने के बाद 30 हजार शरणार्थियों को नोटिस जारी किए हैं। इसके विरोध में पंजाबी स्टूडेंट्स सहित अन्य देशों के छात्रों ने बिनीपेग में 15,16 और 17 अप्रैल को प्रदर्शन किए। सरकार से वर्क परमिट खत्म न करने और डिपोर्टेशन न करने की मांग की।
कनाडा सरकार की तरफ से वर्क परमिट खत्म हो चुके और शरणार्थी के तौर पर रहे रहे स्टूडेंट्स को दिए नोटिस में कहा है कि आपनी अयोग्यता का आधार स्पष्ट किया जाए। आपने कनाडा में आने के 1 साल के अंदर शरण के लिए एप्लाई नहीं किया है, इसलिए आपकी शरण की अर्जी को खारिज क्यों न कर दिया जाए।
मेडिकल इमरजेंसी या मूल देश में जान के खतरे की सूरत में डॉक्यूमेंट देने होंगे। सभी से 21 दिन के अंदर यानी 3 मई तक जवाब मांगा है। नोटिस में कहा गया है कि अगर तय समय में जवाब नहीं मिला तो वर्क परमिट रद्द कर दिया जाएगा और डिपोर्टेशन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
कनाडा सरकार के इस फैसले से पंजाबी स्टूडेंट्स बड़ी संख्या में कानूनी सलाह ले रहे हैं। इमीग्रेशन के डाटा के अनुसार 30 हजार नोटिस वाले लोगों में 9 हजार के लगभग पंजाबी शामिल हैं।
कनाडा सरकार का कहना है कि नए कानून बिल C-12 के लागू करने का उद्देश्य अवैध रूप से रह रहे लोगों की पहचान करना है। नए बिल में अब शरणार्थियों की सुनवाई शरणार्थी बोर्ड में नहीं होगी। पहले बिना वर्क परमिट के काम करने पर अगर कोई पकड़ा जाता था तो उसकी सुनवाई शरणार्थी बोर्ड करता था जिसमें सालों लग जाते थे। पहले जानें नया बिल C-12 क्या है
बिल C-12 कनाडा का इमीग्रेशन कानून है। इसे हाल ही में पेश किया गया है। इसे इमीग्रेशन सिस्टम को सही करने के लिए लाया गया है। पुराने नियमों में कोई भी व्यक्ति कनाडा पहुंचने के बाद कभी भी शरण के लिए आवेदन कर सकता था और उसका मामला वर्षों तक अदालतों में चलता रहता था। लेकिन नए कानून के तहत अब कनाडा में आने के 1 साल के अंदर शरण का दावा करना जरूरी कर दिया गया है। ऐसा न करने वाला अगर पकड़ा जाता है तो उसे बिना सुनवाई के डिपोर्ट करने का नियम है।
नोटिस देने का कारण भी यही कानून है क्योंकि इसको 2025 से लागू किया गया है। इससे पहले से रह रहे लोग भी इसके दायरे में आ गए। बहुत से पंजाबी स्टूडेंट ऐसे हैं जो स्टडी पूरी होने के बाद वर्क परमिट या शरण लेकर काम कर रहे हैं। नए कानून के खिलाफ और शरण देने लिए भारतीय स्टूडेंट्स लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं।
10 सवाल-जवाब में समझें पूरा मामला
सवाल-नए कानून में क्या डिपोर्ट करना संभव है, नोटिस मिलते ही क्या देश से बाहर कर दिया जाएगा?
जवाब-नहीं। यह नोटिस शरणार्थी के रूप में रह रहे लोगों को अपनी बात रखने का एक मौका है। यह डिपोर्टेशन ऑर्डर नहीं है। सरकार बस यह कह रही है कि नए नियमों के हिसाब से आप अयोग्य हैं। नोटिस मिलने वालों को अपनी योग्यता साबित करने का मौका मिलेगा।
सवाल- क्या नोटिस का जवाब खुद दे सकते हैं, क्या करना होगा?
जवाब-सबसे पहले अपने नोटिस पर लिखी तारीख देखें। इसके 21 दिन में जवाब देना होगा। खुद से जवाब देने की कोशिश न करें, क्योंकि यह कानूनी मामला है। अच्छे इमिग्रेशन वकील की मदद से ही जवाब दें। कोई भी फेक डॉक्यूमेंट न दें।
सवाल- नोटिस क्यों और किन लोगों को भेजे जा रहे हैं?
जवाब-सरकार ने नियम बनाया है कि अगर आप कनाडा आने के 1 साल बाद शरण मांगते हैं, तो आप अयोग्य माने जाएंगे। यह नोटिस उन्हीं लोगों को आ रहे हैं जिन्होंने आवेदन करने में देरी की।
सवाल- अगर किसी ने देरी से आवेदन किया था, क्या उसे अब डिपोर्ट कर दिया जाएगा?
जवाब-नहीं। तुरंत कुछ नहीं होगा। कानून में कुछ अपवाद हैं। आपके पास देरी की कोई ठोस वजह है तो डिपोर्ट होने से बच सकते हैं। जैसे बीमारी, मानसिक स्थिति ठीक न होना या भारत में जान का खतरा।
सवाल-अगर ठोस सबूत न दे पाए तो क्या वर्क परमिट तुरंत रद्द कर दिया जाए जाएगा?
जवाब-नहीं। नियमों के अनुसार, अयोग्य पाए जाने के बाद भी वर्क परमिट 90 दिन तक वैध रहेगा। इस दौरान आप कानूनी सलाह लेकर अगले कदम की तैयारी कर सकते हैं।
सवाल-जिन लोगों को नोटिस मिला है क्या इसके बाद भी वे पीआर के लिए अप्लाई कर सकते हैं ?
जवाब-शरण के जरिए अब यह मुश्किल हो गया है। अगर आपकी पत्नी या पति कनाडा पीआर या कोई और वैध वीजा हो तो आप पीआर के लिए आवेदन कर सकते हैं या डिपोर्टेशन से बच सकते हैं।
सवाल-अगर 21 दिन में जवाब न दे पाए तो क्या समय बढ़ाने की मांग कर सकते हैं?
जवाब-आमतौर पर समय मिलना मुश्किल है। वकील विभाग से समय बढ़ाने की मांग कर सकता है, लेकिन आपके पास कोई वाजिब कारण होना जरूरी है।
सवाल-अगर नोटिस का दिया गया जवाब रिजेक्ट हो गया तो क्या होगा?
जवाब-इसके बाद आपके पास प्री रीमूवल रिस्क एसेसमेंट का विकल्प एक विकल्प रहेगा। इसमें सरकार आखिरी बार जांचती है कि क्या आपको वापस भारत भेजने पर सच में आपकी जान को खतरा है।
सवाल-क्या नोटिस मिलने वालों को मर्जी से कनाडा छोड़ देना चाहिए?
जवाब-बिना वकील की सलाह के कोई कदम न उठाएं। इतना जरूर है कि अगर आप खुद वापस जाते हैं, तो फ्यूचर में वापस आने के रास्ते खुले रह सकते हैं, जबकि डिपोर्ट होने पर बैन लग सकता है।
सवाल- पंजाब के कितने लोग नोटिस मिलने से प्रभावित हुए हैं?
जवाब- कनाडा इमिग्रेशन डिपार्टमेंट का कहना है कि इसका अलग से डेटा नहीं हैं लेकिन नोटिस सर्व होने वाले 30 हजार लोगों में से 30 फीसदी यानी 9 हजार के करीब पंजाबी युवा हैं। ये लोग अस्थायी वीजा या शरण लेकर काम कर रहे हैं। कनाडा सरकार बोली-वर्क परमिट न मिलने वाले शरणार्थी नहीं
कनाडा सरकार इमिग्रेशन मिनिस्टर मार्क मिलर का कहना है कि यह बदलाव कनाडा के इमिग्रेशन सिस्टम को पारदर्शी करने के लिए है। सरकार का तर्क है नए कानून में वही लोग शरणार्थी माने जाएंगे जो युद्ध, हिंसा या उत्पीड़न के शिकार हैं। अब पीआर न मिलने वालों को शरणार्थी के तौर पर मान्यता नहीं दी जाएगी। वीजा न मिलने के कारण भारत, मेक्सिको और नाइजीरिया के बहुत से लोग अवैध रूप से रह रहे हैं। पंजाब से सालाना डेढ़ लाख स्टूडेंट जाते हैं
बता दें कि नए इमिग्रेशन कानून का सबसे ज्यादा असर पंजाबी स्टूडेंट्स पर पड़ेगा। पंजाब के जालंधर, अमृतसर, लुधियाना, कपूरथला और होशियारपुर सहित अन्य जिलों से सालाना डेढ़ लाख स्टूडेंट्स कनाडा के कॉलेजों में एडमिशन लेते हैं। कोर्स पूरा होने पर इनको वर्क परमिट मिलता है। वर्क परमिट खत्म होने पर ये स्टूडेंट्स कनाडा के शरणार्थी बोर्ड में यहां रहने के लिए अप्लाई कर देते थे। ऐसे केस सालों साल चलते थे और ये काम करते रहते थे।
इमिग्रेशन एक्सपर्ट का मानना है कि अब रिफ्यूजी का रास्ता लगभग बंद हो चुका है।
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