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ईरान में कैद भारतीय मर्चेंट नेवी के तीन वरिष्ठ अधिकारियों की रिहाई और सुरक्षित स्वदेश वापसी को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका पर 27 जुलाई को सुनवाई होगी। यदि जुर्माने की राशि को अतिरिक्त कारावास में बदलने की प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो तीनों भारतीय अधिकारियों के दोबारा जेल जाने का खतरा बढ़ सकता है। याचिका में केंद्र सरकार के विदेश मंत्रालय और महानिदेशालय शिपिंग को निर्देश देने की मांग की गई है कि वे इस मामले में तत्काल, प्राथमिकता के आधार पर और समयबद्ध कार्रवाई करें। मामला वाणिज्यिक जहाज MT Global Cherilyn से जुड़ा है। कथित अवैध ईंधन तस्करी के आरोपों के बाद ईरानी अधिकारियों ने जहाज के खिलाफ कार्रवाई की थी। अब विस्तार से पढ़ें क्या है पूरा मामला:- कैदी हस्तांतरण समझौते के तहत भारत लाने की मांग याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट को बताया कि भारत और ईरान के बीच द्विपक्षीय कैदी हस्तांतरण समझौता लागू है। ऐसे में नवंबर 2025 में पैरोल मिलने के बाद तीनों अधिकारियों को इस समझौते के तहत भारत वापस लाया जा सकता था। याचिका में आरोप लगाया गया है कि इस संबंध में आवश्यक कागजी और राजनयिक प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो सकी है। याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से मांग की है कि विदेश मंत्रालय और महानिदेशालय शिपिंग को तत्काल हस्तक्षेप कर तीनों अधिकारियों की रिहाई और सुरक्षित स्वदेश वापसी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए जाएं। अब 27 जुलाई को होने वाली पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की सुनवाई को बेहद अहम माना जा रहा है।
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ईरान में कैद 3 भारतीयों का मामला पहुंचा हाईकोर्ट:जुर्माना न चुकाने पर फिर जेल जाने का खतरा, 27 जुलाई को सुनवाई







