हरियाणा के पंचकूला में कोर्ट ने सोशल मीडिया के जरिए नाबालिगों से जुड़ा आपत्तिजनक कंटेंट शेयर करने के आरोपी 19 वर्षीय युवक की जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने उसकी दूसरी जमानत याचिका खारिज करते हुए टिप्पणी की कि ऐसे अपराध समाज की नैतिकता की जड़ों पर प्रहार करते हैं और बच्चों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं। कोर्ट ने कहा कि यदि आरोप साबित होते हैं तो यह न केवल जघन्य अपराध है, बल्कि इससे बाल यौन शोषण जैसी प्रवृत्तियों को बढ़ावा मिलता है। ऐसे मामलों में सख्ती बरतना जरूरी है ताकि साइबर अपराधों पर रोक लग सके। यह आरोपी की दूसरी जमानत याचिका थी, जिसे अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने खारिज कर दिया। कोर्ट ने माना कि प्रथम दृष्टया इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य आरोपी की संलिप्तता दर्शाते हैं और मामले की गंभीरता को देखते हुए उसे जमानत देना उचित नहीं होगा। साइबर टिपलाइन से हुआ खुलासा मामले की शुरुआत 30 जनवरी को साइबर टिपलाइन पर मिली शिकायत से हुई थी। शिकायत में एक इंस्टाग्राम अकाउंट के जरिए कई लोगों को नाबालिगों से जुड़ा आपत्तिजनक कंटेंट भेजने की बात सामने आई थी। जांच में मोबाइल के सब्सक्राइबर डिटेल रिकॉर्ड (SDR) के आधार पर आरोपी की पहचान कर उसे करनाल से गिरफ्तार किया गया। बाद में उसे अंबाला सेंट्रल जेल भेज दिया गया। बचाव पक्ष की दलीलें खारिज आरोपी के वकील ने कोर्ट में कहा कि उसे झूठा फंसाया गया है और वह 3 फरवरी 2026 से हिरासत में है। ट्रायल लंबा चलने की संभावना के चलते जमानत देने की मांग की गई। हालांकि, सरकारी पक्ष ने इसका विरोध करते हुए कहा कि आरोपी के बाहर आने पर साक्ष्यों से छेड़छाड़ और गवाहों को प्रभावित करने का खतरा है। कोर्ट की सख्त टिप्पणी कोर्ट ने कहा कि इस स्तर पर साक्ष्यों की गहराई से जांच संभव नहीं है, लेकिन अपराध की गंभीरता, दोबारा अपराध की आशंका और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से छेड़छाड़ के खतरे को देखते हुए जमानत नहीं दी जा सकती। अगर दोष सिद्ध होता है तो आरोपी को 5 साल तक की सजा और 10 लाख रुपए तक का जुर्माना हो सकता है। वहीं, दोबारा दोषी पाए जाने पर सजा 7 साल तक बढ़ सकती है।
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इंस्टाग्राम पर आपत्तिजनक कंटेंट मामला:पंचकूला कोर्ट से 19 साल के युवक की जमानत खारिज; कहा-ये समाज की नैतिकता पर सीधा वार
