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राज्यसभा सांसद संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने संसद के मानसून सत्र के दौरान देश की नदियों और प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। विशेष उल्लेख के दौरान उन्होंने कहा कि यदि नदियों, दरियाओं, चोओं, नालों, झीलों और अन्य प्राकृतिक जल स्रोतों पर हो रहे अवैध कब्जों को तुरंत नहीं हटाया गया, तो इसके गंभीर परिणाम पर्यावरण, कृषि और आने वाली पीढ़ियों पर पड़ेंगे। संत सीचेवाल ने केंद्र और राज्य सरकारों से अपील की कि वे राष्ट्रीय हरित अधिकरण के आदेशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें और सभी प्राकृतिक जल स्रोतों को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए प्रभावी कार्रवाई करें। उन्होंने कहा कि नदियां केवल जल का स्रोत नहीं हैं, बल्कि देश की संस्कृति, कृषि, पर्यावरण और जनजीवन की आधारशिला हैं। उन्होंने सदन को बताया कि देश के कई हिस्सों में नदियों के बाढ़ क्षेत्रों, जलग्रहण क्षेत्रों और प्राकृतिक जलमार्गों पर बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण और कब्जे हो चुके हैं। इसके कारण प्राकृतिक जल प्रवाह बाधित हो रहा है और बाढ़ का खतरा लगातार बढ़ रहा है। सांसद ने पंजाब का दिया उदाहरण पंजाब का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि राज्य की कई नदियों, चोओं और ड्रेनों पर हुए अतिक्रमण के कारण बारिश और बाढ़ का पानी समय पर नहीं निकल पाता, जिससे लोगों और पर्यावरण को नुकसान उठाना पड़ता है। संत सीचेवाल ने यह भी कहा कि एनजीटी अपने कई फैसलों में स्पष्ट कर चुका है कि नदियों के बाढ़ क्षेत्रों और प्राकृतिक जलमार्गों पर किसी भी प्रकार का अवैध निर्माण स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 48(ए) और 51ए(जी) का उल्लेख करते हुए पर्यावरण संरक्षण को सरकार और नागरिकों दोनों की जिम्मेदारी बताया। उन्होंने सरकार से देशभर में समयबद्ध अभियान चलाकर नदियों और अन्य जल स्रोतों से अवैध कब्जे हटाने की मांग की। साथ ही सामाजिक, धार्मिक संस्थाओं और आम नागरिकों से नदियों के संरक्षण के लिए जन आंदोलन खड़ा करने का आह्वान किया।
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