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चंडीगढ़ में डिजिटल अरेस्ट कर ठगे 46 लाख:गुजरात से 3 गिरफ्तार, ट्रांजिट रिमांड पर लाए गए आरोपी, खुद को पुलिस अधिकारी बताया




चंडीगढ़ में पुलिस अधिकारी बताकर डिजिटल अरेस्ट कर 46 लाख की ठगी करने वाले गिरोह से जुड़े तीन आरोपियों को साइबर सेल ने गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान रमेश अजय भाई अबचुंग, योगेश देवजी महेश्वरी और हितेश नरन बोरिचा के रूप में हुई है। तीनों आरोपी गुजरात के कच्छ जिले के गांधीधाम के रहने वाले हैं। पुलिस ने इन्हें गुजरात से गिरफ्तार कर ट्रांजिट रिमांड पर चंडीगढ़ लाया। आरोपियों को साइबर सेल थाना प्रभारी इंस्पेक्टर दविंदर की अगुवाई में पकड़ा गया है। खुद को पुलिस अधिकारी बताकर डराया आरोपियों ने बुजुर्ग व्यक्ति को फोन कर खुद को पुलिस/जांच एजेंसी का अधिकारी बताया। उन्होंने कहा कि उसका नाम किसी बड़े केस में आया है और उसे “डिजिटल अरेस्ट” किया जा रहा है। इसके बाद वीडियो कॉल के जरिए उसे लगातार निगरानी में रखा गया, ताकि वह किसी से संपर्क न कर सके। आरोपियों ने उसे डराया कि अगर उसने सहयोग नहीं किया तो उसे तुरंत गिरफ्तार कर लिया जाएगा और उसके बैंक खाते भी फ्रीज कर दिए जाएंगे। इसी दबाव में आकर पीड़ित ने आरोपियों के बताए खातों में अलग-अलग किश्तों में 46 लाख रुपए ट्रांसफर कर दिए। इस तरह आरोपियों ने डर और झूठे कानूनी डर का इस्तेमाल कर डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी को अंजाम दिया। 46 लाख रुपए की ठगी का मामला मामला दिसंबर 2025 का है, जब एक बुजुर्ग शिकायतकर्ता को डिजिटल अरेस्ट के नाम पर झांसा देकर अलग-अलग बैंक खातों में कुल 46 लाख रुपए जमा करवाए गए। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने तकनीकी निगरानी और फील्ड जांच के आधार पर आरोपियों तक पहुंच बनाई। जांच में सामने आया कि आरोपी रमेश के बैंक खाते में ठगी के करीब 15 लाख रुपए जमा करवाए गए थे, जिन्हें बाद में अलग-अलग स्थानों से निकालकर अन्य खातों में ट्रांसफर किया गया।
पुलिस के अनुसार, रमेश ने अपना बैंक खाता कमीशन के आधार पर अन्य आरोपियों के जरिए अहमदाबाद के एक व्यक्ति को उपलब्ध कराया था, जिसके माध्यम से ठगी की रकम को घुमाया जा रहा था। आरोपी बैंक खाते मुहैया कराते थे पूछताछ के दौरान आरोपियों ने खुलासा किया कि वे साइबर ठगी गिरोह के लिए अपने बैंक खाते मुहैया कराते थे। इन खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम को जमा करने और फिर अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर छुपाने के लिए किया जाता था। आरोपियों ने बताया कि वे कमीशन के आधार पर अपने खाते गिरोह के अन्य सदस्यों को देते थे। इसके बदले उन्हें तय रकम मिलती थी। गिरोह के अन्य सदस्य लोगों को डिजिटल अरेस्ट के नाम पर डराकर पैसे ट्रांसफर करवाते थे, जबकि ये आरोपी उस पैसे को निकालने और आगे पहुंचाने का काम करते थे। पुलिस के अनुसार, आरोपियों के तार एक बड़े नेटवर्क से जुड़े हुए हैं और पूछताछ के आधार पर अन्य सदस्यों की पहचान की जा रही है।



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