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26 मिनट पहले
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2016 और 2020 के चुनावों में क्या हुआ?
2016 चुनाव: हैकिंग हुई, वोटों में छेड़छाड़ नहीं
रिपोर्ट के मुताबिक, 2016 के अमेरिकी चुनाव में रूसी हैकरों ने सभी 50 राज्यों के चुनावी सिस्टम को निशाना बनाया था। उन्होंने सिस्टम की कमजोरियां तलाशने की कोशिश की, लेकिन वोटिंग या मतगणना में कोई छेड़छाड़ नहीं हुई।
इसी दौरान डेमोक्रेटिक पार्टी के ईमेल हैक कर लीक किए गए और इलिनॉय के वोटर डेटाबेस में सेंध लगी, लेकिन किसी मतदाता का रिकॉर्ड बदले जाने का सबूत नहीं मिला।
फ्लोरिडा के दो काउंटी में भी ऐसी घटनाएं हुई थीं। इसके बाद अमेरिका ने चुनावी सुरक्षा कड़ी की, ज्यादातर वोटिंग मशीनों को इंटरनेट से अलग किया और लगभग हर वोट का पेपर बैकअप अनिवार्य कर दिया।
2020 चुनाव: रूस और ईरान ने चलाया ऑनलाइन कैंपेन
अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, 2020 के चुनाव में रूस ने जो बाइडेन के खिलाफ, जबकि ईरान ने डोनाल्ड ट्रम्प के खिलाफ ऑनलाइन प्रचार और दुष्प्रचार कैंपेन चलाया।
ईरान अलास्का के वोटर डेटाबेस तक भी पहुंचा, लेकिन वोटर रिकॉर्ड बदलने या चुनावी नतीजों से छेड़छाड़ का कोई सबूत नहीं मिला। बाद में अमेरिका ने इस मामले में दो ईरानी नागरिकों पर आरोप तय किए।
वहीं, रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन ने वोटिंग सिस्टम या मतगणना में दखल नहीं दिया, हालांकि उस पर अमेरिकी जनमत को प्रभावित करने की कोशिश के आरोप लगते रहे हैं।







