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हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर में हुई तेज बारिश का कुरुक्षेत्र के शाहाबाद के कई गांवों में दिखा। यहां सुबह करीब 6 बजे मारकंडा में 14 हजार क्यूसेक से ज्यादा पानी आने के बाद कठवा, कलसाना, तंगोर और मोहनपुर में नदी का पानी घुस गया। सबसे ज्यादा असर गांव कठवा पर पड़ा, जहां गांव को शहर और दूसरे गांवों से जोड़ने वाली मुख्य सड़क पानी में डूब गई। सुबह काम पर जाने वाले लोगों को काफी मुश्किल हुई। बच्चे बस के जरिए स्कूल पहुंचे। यहां से पानी आसपास के खेतों में चला गया। बारिश से बढ़ेंगी मुश्किलें पानी का बहाव तेज होने से दूसरे गांव तंगोर का कुछ एरिया भी चपेट में आ गया। गनीमत रही दोनों गांव में पानी घरों तक नहीं आया। हालांकि मारकंडा में पानी का लेवल कम होने पर ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। लेकिन पहाड़ों पर फिर ज्यादा बरसात हुई, तो मुश्किल बढ़ जाएगी। कलसाना और मोहनपुर में घुसा पानी ग्रामीणों के मुताबिक, मारकंडा का पानी कलसाना गांव तक मार कर गया। यहां तटबंध से पानी पाइप के जरिए बैक मार गया, जिससे कलसाना गांव के निचले हिस्से डूब गए। यहां कई घरों में पानी घुस गया। यहां एक घर में पानी के साथ बहकर आए सांप ने गाय को काट लिया। इससे गाय की मौत हो गई। जेसीबी से काटा तटबंध इसके बाद गांव की सरपंच दलजीत कौर ने जेसीबी की मदद से तटबंध की मिट्टी हटवाई। इससे पानी को रास्ता मिल गया और पानी मोहनपुर गांव की तरफ आ गया। हालांकि यहां पानी खेतों तक ही सीमित रहा। लेकिन खेतों में पानी भरने से फसलों को नुकसान पहुंचा है। सुबह 14,294 क्यूसेक पानी, 3 घंटे बाद घटा स्तर शाहाबाद के गेज रीडर रविंद्र कुमार ने बताया कि सुबह 6 बजे मारकंडा नदी में 14,294 क्यूसेक पानी बह रहा था। सुबह 9 बजे तक यह घटकर 11,711 क्यूसेक रह गया। यानी करीब तीन घंटे में लगभग ढाई हजार क्यूसेक पानी कम हुआ। अभी नदी खतरे के निशान से करीब डेढ़ फुट नीचे, करीब साढ़े 10 फुट के निशान पर बह रही है। 14 हजार क्यूसेक पार होते ही डूबता है कठवा ग्रामीणों के मुताबिक, जैसे ही मारकंडा में पानी का स्तर 14 हजार क्यूसेक के ऊपर पहुंचता है, सबसे पहले कठवा गांव प्रभावित होता है। तटबंध के ऊपर से पानी निकलकर गांव की ओर आता है। यहां की मुख्य सड़क डूब जाती है। इस बार भी यही स्थिति बनी। सड़क बंद होने से लोगों का आवागमन रुक गया। ग्रामीण बोले- हर साल यही कहानी कठवा और आसपास के गांवों के लोगों ने प्रशासन और सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई। उनका कहना है कि हर साल मानसून से पहले बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं कि इस बार बाढ़ से बचाव के पुख्ता इंतजाम होंगे, लेकिन पहली ही तेज बारिश के बाद हालात पहले जैसे हो जाते हैं। 3 महीने पहले कलसाना में बनाया था तटबंध करीब 3 महीने पहले कलसाना गांव के पास तटबंध बनाया गया था। तटबंध को मिट्टी डालकर बनाया, लेकिन तटबंध में डले पाइप से पानी ने गांव की तरफ मार दी।
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कुरुक्षेत्र के 4 गांवों में घुसा मारकंडा का पानी:बाढ़ जैसे हालात, खेत जलमग्न; सांप के काटने से गाय की मौत







