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चंडीगढ़ सेक्टर-11 स्थित श्री कुमार मेडिकल हॉल के कैशियर जानकी दास हत्याकांड के मास्टरमाइंड गैंगस्टर गोल्डी ढिल्लों को भारतीय एजेंसियों के सहयोग से स्पेन में गिरफ्तार कर लिया गया है। गोल्डी ढिल्लों लंबे समय से विदेश में बैठकर पंजाब, चंडीगढ़ और दिल्ली-एनसीआर में अपना आपराधिक नेटवर्क चला रहा था। अब उसे जल्द भारत लाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। भारत आने के बाद चंडीगढ़ पुलिस उसे प्रोडक्शन वारंट पर लेकर सेक्टर-11 हत्याकांड में पूछताछ करेगी। गोल्डी ढिल्लों पहले से ही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) का वांछित आरोपी है। उसके खिलाफ 10 लाख रुपए का इनाम घोषित किया गया था। सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से उसकी तलाश में जुटी थीं। राजपुरा का रहने वाला गोल्डी ढिल्लों शुरुआत में मारपीट, धमकी और आर्म्स एक्ट के मामलों में शामिल रहा। बाद में उसने व्यापारियों से जबरन वसूली शुरू कर दी। पुलिस का दबाव बढ़ने पर वह भूमिगत हो गया और बड़े गैंगों के लिए शूटर, हथियार और ठिकानों की व्यवस्था करने लगा। बताया जाता है कि वर्ष 2022 में वह विदेश फरार हो गया। इसके बाद उसने विदेश में बैठकर पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली-एनसीआर में अपना नेटवर्क मजबूत किया। कैशियर हत्याकांड के बाद कारोबारियों को धमकी 13 जून को सेक्टर-11 स्थित श्री कुमार मेडिकल हॉल के कैशियर जानकी दास की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड के बाद गोल्डी ढिल्लों ने इसकी जिम्मेदारी ली थी। इसके बाद उसने चंडीगढ़ के कई कारोबारियों को विदेशी नंबरों से फोन कर रंगदारी मांगी। पुलिस के अनुसार, जब कारोबारी विदेशी नंबर देखकर कॉल नहीं उठाते थे तो वह वॉइस मैसेज भेजकर गालियां देता और जान से मारने की धमकी देता था। वह दावा करता था कि पुलिस सुरक्षा बढ़ाने के बावजूद वह अपनी वारदातों को अंजाम देता रहेगा। लॉरेंस गैंग से अलग होकर बना विरोधी जांच एजेंसियों के अनुसार, गोल्डी ढिल्लों पहले गैंगस्टर गोल्डी बराड़ और लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़ा हुआ था। बाद में गैंग के भीतर विवाद बढ़ने के बाद उसने अलग रास्ता अपना लिया और लॉरेंस गुट का विरोधी बन गया। पुलिस का कहना है कि वह अपने गुर्गों के जरिए टारगेट किलिंग और रंगदारी की वारदातों को अंजाम दिलाता था। हाल ही में पटियाला पुलिस ने उसके दो गुर्गों को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में खुलासा हुआ था कि उन्हें राजपुरा और मोहाली में हत्या की वारदात को अंजाम देने का जिम्मा दिया गया था। पहचान छिपाने के लिए एन्क्रिप्टेड कॉलिंग ऐप करता था इस्तेमाल गोल्डी ढिल्लों अपनी पहचान छिपाने के लिए एन्क्रिप्टेड कॉलिंग ऐप और वीपीएन का इस्तेमाल करता था। वह पंजाब और हरियाणा के युवाओं को पैसे और विदेश भेजने का लालच देकर अपने गैंग में शामिल करता था। इसके बाद उन्हीं के जरिए रंगदारी, टारगेट किलिंग और अन्य आपराधिक वारदातों को अंजाम दिलाया जाता था। जांच में उसके प्रतिबंधित खालिस्तानी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल (BKI) से संबंधों की भी बात सामने आई है, जिसकी विभिन्न एजेंसियां जांच कर रही हैं। कई राज्यों में दर्ज मामले पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, गोल्डी ढिल्लों के खिलाफ पंजाब के जालंधर, पटियाला और लुधियाना में जबरन वसूली, गैंगवार, हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट के कई मामले दर्ज हैं। चंडीगढ़ में सेक्टर-11 मेडिकल स्टोर हत्याकांड के बाद क्राइम ब्रांच उसकी तलाश में जुटी हुई थी। वहीं दिल्ली के रोहिणी इलाके से उसके दो गुर्गों जतिन और सुखविंदर को भी गिरफ्तार किया जा चुका है।
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कैशियर हत्याकांड का मास्टमाइंड गोल्डी ढिल्लो स्पेन में अरेस्ट:भारत लाकर चंडीगढ़ पुलिस करेगी पूछताछ; लॉरेंस गैंग से अलग होकर बना विरोधी







