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पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने शौर्य चक्र विजेता बलविंदर सिंह संधू की हत्या के मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी गुरविंदर सिंह उर्फ बाबा की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि केवल लंबे समय तक जेल में रहना जमानत देने का आधार नहीं हो सकता, खासकर तब जब मामला राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकी साजिश जैसे गंभीर आरोपों से जुड़ा हो। हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपी पर लगे आरोप बहुत गंभीर हैं। जांच एजेंसी की ओर से पेश किए गए दस्तावेज और सबूत पहली नजर में आरोपों को मजबूत करते हैं। इसलिए फिलहाल आरोपी को जमानत नहीं दी जा सकती। अदालत ने यह भी माना कि रिकॉर्ड में ऐसे तथ्य मौजूद हैं जो आरोपी के कथित तौर पर अलगाववादी खालिस्तानी संगठन से संबंधों की ओर इशारा करते हैं। न्यायालय ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में आरोपों की गंभीरता, उपलब्ध साक्ष्य और समाज पर पड़ने वाले प्रभाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। 2022 में एनआईए ने किया था गिरफ्तार मामले की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने वर्ष 2022 में गुरविंदर सिंह उर्फ बाबा को गिरफ्तार किया था। जांच के दौरान सामने आया था कि बलविंदर सिंह संधू की हत्या में इस्तेमाल किए गए हथियार आरोपियों तक पहुंचाने में उसकी अहम भूमिका थी। एनआईए के अनुसार गुरविंदर सिंह पूरी साजिश का महत्वपूर्ण हिस्सा था और उसने वारदात को अंजाम देने में सक्रिय सहयोग किया था। जांच एजेंसी का दावा है कि आरोपी ने शूटरों को हथियार उपलब्ध करवाने और साजिश को सफल बनाने में मदद की थी। यूएपीए मामलों में जमानत के नियम सख्त हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत दर्ज मामलों में जमानत देने के लिए सामान्य आपराधिक मामलों की तुलना में अधिक कड़े मानदंड लागू होते हैं। अदालत ने कहा कि अगर जांच एजेंसी के पास आरोपी के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं और पहली नजर में आरोप सही लगते हैं, तो उसे जमानत नहीं दी जा सकती। ऐसे मामलों में अदालत आरोपों की गंभीरता, उपलब्ध सबूतों और देश की सुरक्षा पर पड़ने वाले असर को ध्यान में रखकर फैसला करती है। स्कूल परिसर के बाहर हत्या गौरतलब है कि शौर्य चक्र विजेता बलविंदर सिंह संधू की 16 अक्टूबर 2020 की सुबह तरनतारन जिले के भिखीविंड में उनके घर-सह-स्कूल परिसर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मोटरसाइकिल पर आए हमलावर वारदात को अंजाम देने के बाद फरार हो गए थे। बलविंदर सिंह संधू ने पंजाब में आतंकवाद के दौर में आतंकियों के खिलाफ खुलकर मुकाबला किया था। उनकी बहादुरी और साहस को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें वर्ष 1993 में शौर्य चक्र से सम्मानित किया था। एनआईए ने बताया था आतंकी साजिश मामले की शुरुआती जांच में पंजाब पुलिस ने विदेश में बैठे खालिस्तानी आतंकियों और उनके सहयोगियों की भूमिका की ओर संकेत किया था। बाद में केंद्र सरकार ने मामले की जांच एनआईए को सौंप दी थी। एनआईए का दावा है कि यह हत्या एक सुनियोजित आतंकी साजिश के तहत कराई गई थी। जांच एजेंसी ने मामले में शामिल आरोपियों के खिलाफ हत्या, आपराधिक साजिश और यूएपीए की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया है।
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शौर्य चक्र विजेता बलविंदर सिंह संधू हत्याकांड:हाईकोर्ट: गुरविंदर उर्फ बाबा की जमानत याचिका खारिज की, 2022 में एनआईए ने किया गिरफ्तार







