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स्टारबक्स को ‘टैंक डे’ शब्द का इस्तेमाल पड़ा भारी:एआई की भूल से ताज़ा हुए जख्म; स्टारबक्स ने स्टोर बंद कर स्टाफ को दी ट्रेनिंग




दक्षिण कोरिया में कॉर्पोरेट कंपनियों को अपने कर्मचारियों को देश की संस्कृति और इतिहास की समझ सिखाना पड़ रहा है। कारण- अपनी संस्कृति और इतिहास को लेकर लोगों की जागरूकता।
कॉफी आउटलेट चेन स्टारबक्स को पिछले महीने मार्केटिंग अभियान में ‘टैंक डे’ शब्द का इस्तेमाल करना भारी पड़ गया। लोगों के ​विरोध की वजह से कंपनी को द. कोरिया में अपने 2,000 स्टोर्स को सोमवार को दोपहर बाद बंद कर 24 हजार शेफ समेत अन्य कर्मचारियों को संस्कृति, इतिहास की क्लास कराना पड़ी। द. कोरिया में स्टारबक्स के सभी स्टोर्स एक साथ बंद होने का यह पहला मामला भी है। क्या है ‘टैंक डे’ विवाद पिछले महीने स्टारबक्स कोरिया ने टंबलर (कॉफी मग का खास प्रकार) की नई सीरीज लॉन्च की। उसका नाम रखा- ‘टैंक डे’। इसकी शुरुआत पिछले महीने हुई, जो 1980 में 18 मई को द. कोरिया के ग्वांगजू में सैन्य तानाशाही के खिलाफ लोकतंत्र समर्थकों के प्रदर्शन हो रहे थे। तब क्रूर सैन्य शासन ने प्रदर्शनकारियों को कुचलने के लिए सड़कों पर ‘टैंक’ उतार दिए थे। इस नरसंहार में सैकड़ों लोग मारे गए थे। तब से कोरियाई लोगों के लिए ‘टैंक’ शब्द सामूहिक हत्या की स्मृति के गहरे दर्द से जुड़ा है। ऐसे में ‘टैंक डे’ शब्द का विज्ञापन में इस्तेमाल लोगों को पीड़ितों का क्रूर उपहास और गहरा अपमान लगा। विरोध की आग पूरे देश में फैल गई, तो स्टारबक्स कोरिया की पैरेंट कंपनी ‘शिनसेगाए ग्रुप’ ने डैमेज कंट्रोल की कवायद शुरू की। विज्ञापन हटाया, माफी मांगी और कंपनी के सीईओ ​को पद से हटा दिया। कंपनी ने चौंकाने वाला खुलासा किया कि विज्ञापन अभियान के लिए नाम और स्लोगन तय करने के लिए कर्मचारियों ने एआई का इस्तेमाल किया और इस शब्द के ऐतिहासिक-सांस्कृतिक संदर्भों की पड़ताल नहीं की। पहले भी विवाद – समाज को समझने में असफलता द. कोरिया में स्टारबक्स के प्रीपेड ग्राहकों के 2,100 करोड़ रु. जमा थे। विज्ञापन विवाद के बाद अधिकांश ने पैसे वापस मांगे। पहले हफ्ते में कार्ड से भुगतान वाले 26% ग्राहक कम हुए। पूरे महीने में यह नुकसान 10% रहा। कोरिया में करीब तीन साल पहले स्पोर्ट्स ब्रांड नाइकी तब विवादों में आ गई थी, जब विज्ञापन में गलत नक्शा दिखाने का आरोप गला था। नाइकी ने विज्ञापन वापस लेने के साथ ही माफी मांगी। कुछ माह पहले बीएचसी चिकन ने विज्ञापन में ‘ग्वांगजू’ शब्द का गलत संदर्भ में इस्तेमाल किया था। स्पष्ट है कि समाज काे न समझने का खमियाजा भुगतना पड़ता है।



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