![]()
पंजाब कांग्रेस में बदलाव में हो रही देरी के बीच पटियाला के सांसद डॉ. धर्मवीर गांधी ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर लिखा कि कोई बड़ा बगावत का डरावा दे रहा है। पार्टी की पुनर्सुरजीती को टालने की कोशिश की जा रही है। यह पार्टी विरोधी कार्रवाई है। लेकिन जैसे ही मामला मीडिया में गर्माया, उन्होंने अपनी पोस्ट डिलीट कर दी। जून के शुरू से ही बदलाव पर काम जानकारी के मुताबिक कांग्रेस में परिवर्तन को लेकर इस महीने की शुरुआत में ही बैठकें शुरू हो गई थीं। 8 और 9 जून को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने दिल्ली में एआईसीसी के सभी 60 सचिवों के साथ समीक्षा बैठकें कीं। इस दौरान सचिवों से पिछले छह महीनों के कामकाज की लिखित रिपोर्ट मांगी गई। इसके बाद 11 जून को कांग्रेस संगठन महासचिव K.C. Venugopal ने दिल्ली स्थित इंदिरा भवन में सभी एआईसीसी महासचिवों, राज्य प्रभारियों और प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) अध्यक्षों की बैठक बुलाई। इसमें मौजूदा राजनीतिक हालात और संगठनात्मक बदलावों पर विस्तार से चर्चा हुई। इस दौरान पंजाब के राजनीतिक हालात का आकलन करने के लिए 3 विशेष पर्यवेक्षक (ऑब्जर्वर्स) नियुक्त किए गए, जिनमें अजय माकन, मीनाक्षी नटराजन और भजन लाल जाटव शामिल थे। 16 से 18 जून को इन तीनों ऑब्जर्वर्स ने दिल्ली के इंदिरा भवन में पंजाब कांग्रेस के करीब 70 से 72 वरिष्ठ नेताओं (सांसदों, विधायकों और पूर्व मंत्रियों) को बुलाकर ‘वन-टू-वन’ फीडबैक लिया कि राज्य में बदलाव होना चाहिए या नहीं। फिर 21 जून को राहुल गांधी ने दिल्ली में 10 जनपथ पर पंजाब के शीर्ष 5 दावेदारों (राजा वड़िंग, प्रताप सिंह बाजवा, चरणजीत चन्नी, सुखजिंदर रंधावा और विजय इंदर सिंगला) के साथ अकेले में एक-एक करके बैठक की। राहुल ने सभी को एकजुट होकर लड़ने का संदेश दिया। इसी दिन सुखजिंदर रंधावा को नया अध्यक्ष बनाने का एक फर्जी पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसे रंधावा और कांग्रेस ने झूठा करार दिया। मनीष तिवारी जता चुके नाराजगी हाल ही में जब कांग्रेस आलाकमान ने पंजाब में संगठनात्मक बदलावों पर चर्चा के लिए राज्य के 60-70 नेताओं को दिल्ली बुलाया, तो मनीष तिवारी को इस बैठक में नहीं बुलाया गया। इस पर उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने सवाल उठाया कि राज्य के इतने प्रमुख नेताओं से सलाह-मशविरा किया गया, लेकिन उन्हें दरकिनार कर दिया गया। सभी वर्गों को साधने की कोशिश इस समय मीडिया चर्चा है कि कांग्रेस अपने प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और एलओपी में बदलाव कर सकती है। चुनाव नजदीक हैं, ऐसे में सारे राजनीतिक समीकरण तय किए जाएंगे। क्योंकि इस समय प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और एलओपी प्रताप सिंह बाजवा दोनों ही जट्ट सिख है। ऐसे में पार्टी की कोशिश हिंदू चेहरे से लेकर दलित सबको साधने की है। पार्टी की कोशिश की जा रही है कि खांका इस प्रकार तैयार किया जाए कि सभी नेता फिट जाए। इसी बीच राहुल गांधी बाहर चले गए हैं। वहीं, इस संबंध में कोई आदेश जारी नहीं हुआ है। हालांकि पार्टी हाईकमान पहले ही कह चुकी है कि किसी तरह का बदलाव पार्टी में नहीं होगा।
Source link
पंजाब कांग्रेस में बदलाव में देरी, सांसद गांधी का बयान:कोई बड़ा बगावत का डरावा देरा है, सोशल मीडिया पोस्ट से उठाए सवाल







