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रियल एस्टेट कंपनी जंता लैंड प्रमोटर्स लिमिटेड ने ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी को 5 करोड़ का कानूनी नोटिस भेजा।
रियल एस्टेट कंपनी जंता लैंड प्रमोटर्स लिमिटेड (JLPL) ने ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMADA) को 5 करोड़ रुपए का कानूनी नोटिस भेजा है। कंपनी का आरोप है कि अदालत में मामला लंबित होने और स्टे होने के बावजूद उसका नाम कथित डिफॉल्टरों की सूची में
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कंपनी की ओर से भेजे गए नोटिस में GMADA के मुख्य प्रशासक को संबोधित करते हुए डिफॉल्टर सूची से नाम हटाने और सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की गई है। नोटिस में कहा गया है कि यदि तीन दिन के भीतर कार्रवाई नहीं की गई तो आगे कानूनी कदम उठाए जाएंगे।
कंपनी को न्यायालय से राहत मिली
मोहाली से आम आदमी पार्टी के विधायक कुलवंत सिंह, जो JLPL से जुड़े हैं, ने कहा कि मामला अदालत में विचाराधीन है और कंपनी को न्यायालय से राहत मिली हुई है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मामले पर स्टे है, तो GMADA ने कंपनी का नाम डिफॉल्टरों की सूची में कैसे शामिल कर दिया।
कुलवंत सिंह ने कहा, “मामला अदालत में लंबित है और हमें कोर्ट से स्टे मिला हुआ है। इसके बावजूद हमारा नाम डिफॉल्टर सूची में डालना समझ से परे है।”
कांग्रेस नेता ने उठाया था बकाया राशि का मुद्दा
यह विवाद उस समय सामने आया जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पंजाब के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू ने आरोप लगाया कि GMADA के अधीन काम करने वाले बड़े रियल एस्टेट डेवलपर्स से सरकार 1,000 करोड़ रुपए से अधिक की बकाया राशि वसूलने में विफल रही है।
सिद्धू ने दावा किया था कि 20 प्रमोटरों को डिफॉल्टर सूची में शामिल किया गया है और उन पर कुल बकाया राशि 1,000 करोड़ रुपए से अधिक है। उन्होंने आरोप लगाया कि JLPL पर अकेले करीब 152 करोड़ रुपए की देनदारी बकाया है।







