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हरियाणा का 661 करोड़ IDFC-AU बैंक घोटाला:आईएएस DK बेहरा लंबी छुट्‌टी पर, CBI पूछताछ के लिए मंजूरी ले चुकी; 1 दिन पहले हुई आरके सिंह की गिरफ्तारी




हरियाणा के बहुचर्चित 661 करोड़ रुपए के IDFC-AU स्मॉल फाइनेंस बैंक घोटाले में सीबीआई का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। सीनियर IAS अधिकारी आरके सिंह की गिरफ्तारी हो चुकी है। सिंह, पंचकूला नगर निगम के आयुक्त रह चुके हैं। फिलहाल, वे सीबीआई की तीन दिन की रिमांड पर है। इसी बीच 2007 बैच के IAS अधिकारी डीके बेहरा भी लंबी छुट्टी पर चले गए हैं, जिसके बाद प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। बेहरा मौजूदा समय में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग में सचिव हैं। इससे पहले गवर्नर असीम घोष सहित कई विभागों की जिम्मेदारी थी, लेकिन जब इस स्कैम का खुलासा हुआ तो उनसे सभी विभागों की जिम्मेदारी वापस ले ली गई थी। सीबीआई की जांच से पहले एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की जांच में सामने आया है कि बेहरा के फर्जी हस्ताक्षर कर कई चेक और डेबिट नोट प्रोसेस किए गए। चौंकाने वाली बात यह है कि वह 28 अक्टूबर 2025 को पद छोड़ चुके थे। इसके बावजूद उनके नाम से लेनदेन जारी रहे। सूत्रों की माने तो CBI ने डीके बेहरा से पूछताछ के लिए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-A के तहत आवश्यक मंजूरी प्राप्त कर ली है। ऐसे में एजेंसी जल्द ही उनसे इस मामले में पूछताछ कर सकती है। 28 अगस्त तक छुट्‌टी, कारण बताया- घर बनवाना है CBI की सक्रियता के बीच डीके बेहरा के लंबी छुट्टी पर जाने को लेकर भी चर्चा है। वे 28 अगस्त तक छुट्‌टी पर गए हैं। हालांकि, उन्होंने छुट्टी का कारण बताया कि वे ओडिशा के रहने वाले है, उन्हें अपना घर बनवाना है। मगर, प्रशासनिक हलकों में उनकी छुट्टी को बैंक घोटाले के घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है। बता दें कि घोटाले की जांच में CBI वित्तीय लेन-देन, बैंक खातों के संचालन, निवेश संबंधी फैसलों और प्रशासनिक मंजूरियों की पड़ताल कर रही है। आरके सिंह की गिरफ्तारी के बाद जांच का फोकस उन अधिकारियों पर भी है, जो उस समय निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा थे। सूत्रों का कहना है कि एजेंसी फाइल रिकॉर्ड, बैंकिंग दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जिम्मेदारियों की कड़ियां जोड़ रही है। दो एजेंसियां कर रही घोटाले की जांच मामले की जांच फिलहाल CBI और प्रवर्तन निदेशालय (ED) दोनों कर रहे हैं। CBI पहले ही 13 लोगों और दो फर्जी संस्थाओं के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है। जांच में सामने आया है कि सरकारी विभागों के करोड़ों रुपए फर्जी एफडीआर के जरिए बैंकिंग सिस्टम में घुमाए गए और बाद में अलग-अलग खातों में भेजे गए। आरके सिंह के बाद ये अफसर सीबीआई के राडार पर जांच के दायरे में आए अधिकारियों में मोहम्मद शाइन, पंकज अग्रवाल, विनीत गर्ग, आरके सिंह, प्रदीप कुमार, मनीराम शर्मा, संकेत कुमार और डॉ. वैभव शर्मा के नाम शामिल बताए जा रहे हैं। हरियाणा सरकार पहले ही इन अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा 17A के तहत जांच की अनुमति दे चुकी है। CBI की नजर अब उस अधिकारी पर है, जिसे सरकारी गवाह बनाकर पूरे घोटाले की परतें खोली जा सकती हैं। यदि ऐसा होता है, तो 661 करोड़ रुपए के इस बहुचर्चित बैंक घोटाले की जांच में बड़ा मोड़ आ सकता है और कई नए नाम भी सामने आ सकते हैं।



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