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चंडीगढ़ मास्टर प्लान-2031 में बदलावों पर तिवारी की आपत्ति:बोले- योजनाकारों, वास्तुकारों, पर्यावरण और विरासत विशेषज्ञों को शामिल कर विशेषज्ञ समिति का हो पुनर्गठन




चंडीगढ़। चंडीगढ़ के सांसद मनीष तिवारी ने मास्टर प्लान-2031 में प्रस्तावित संशोधनों को लेकर मुख्य सचिव को विस्तृत सुझाव और आपत्तियां भेजी हैं। प्रशासन की ओर से डीरेगुलेशन 1.0 और डीरेगुलेशन 2.0 के तहत प्रस्तावित बदलावों पर आम जनता से सुझाव और आपत्तियां मांगी गई थीं, जिसके जवाब में सांसद ने अपना पक्ष प्रशासन के समक्ष रखा है। मनीष तिवारी ने कहा कि मास्टर प्लान में प्रस्तावित संशोधन शहर के शहरी स्वरूप, बुनियादी ढांचे, पर्यावरण और विरासत पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकते हैं। ऐसे में किसी भी बड़े बदलाव से पहले पारदर्शी, वैज्ञानिक और व्यापक जनभागीदारी वाली प्रक्रिया अपनाना जरूरी है। विशेषज्ञ समिति के पुनर्गठन की मांग सांसद ने मास्टर प्लान संशोधनों के लिए गठित विशेषज्ञ समिति की संरचना पर सवाल उठाते हुए इसके पुनर्गठन की मांग की है। उन्होंने कहा कि समिति में स्वतंत्र शहरी योजनाकारों, वास्तुकारों, पर्यावरण विशेषज्ञों, विरासत संरक्षण विशेषज्ञों और जनप्रतिनिधियों को शामिल किया जाना चाहिए, ताकि सभी पहलुओं पर संतुलित और विशेषज्ञ राय के आधार पर निर्णय लिए जा सकें। प्रभाव आकलन रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग मनीष तिवारी ने कहा कि प्रस्तावित संशोधनों में बढ़ा हुआ एफएआर (फ्लोर एरिया रेशियो), अधिक ग्राउंड कवरेज, ऊंची इमारतों, मिश्रित भूमि उपयोग और औद्योगिक क्षेत्रों में प्रस्तावित ढील जैसे महत्वपूर्ण बदलाव शामिल हैं। इनका शहर पर पड़ने वाले प्रभाव का वैज्ञानिक आकलन जरूरी है। उन्होंने मांग की कि ट्रैफिक इम्पैक्ट असेसमेंट, पर्यावरणीय प्रभाव अध्ययन, इंफ्रास्ट्रक्चर क्षमता मूल्यांकन, पार्किंग एवं मोबिलिटी अध्ययन और हेरिटेज इम्पैक्ट असेसमेंट जैसी रिपोर्टों को सार्वजनिक किया जाए, ताकि नागरिक तथ्यों के आधार पर अपनी राय दे सकें। 21 दिन की समय सीमा पर उठाए सवाल सांसद ने सुझाव और आपत्तियां दर्ज कराने के लिए निर्धारित 21 दिन की समय सीमा को भी अपर्याप्त बताया। उनका कहना है कि इतने व्यापक और दूरगामी प्रभाव वाले प्रस्तावों पर चर्चा और समीक्षा के लिए अधिक समय दिया जाना चाहिए। मनीमाजरा और सेक्टर-43 के प्रस्तावों पर चिंता मनीष तिवारी ने मनीमाजरा में प्रस्तावित उच्च घनत्व विकास, विकास मार्ग और सेक्टर-43 में मिश्रित भूमि उपयोग विस्तार, औद्योगिक क्षेत्रों में एफएआर वृद्धि तथा संस्थागत क्षेत्रों में ऊंची इमारतों की अनुमति जैसे प्रस्तावों पर भी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि इन बदलावों को लागू करने से पहले पानी, सीवरेज, सड़क, पार्किंग, बिजली और ठोस कचरा प्रबंधन जैसी बुनियादी सुविधाओं की क्षमता का विस्तृत आकलन किया जाना चाहिए। वार्ड-वार इंफ्रास्ट्रक्चर ब्लूप्रिंट सार्वजनिक करने की मांग सांसद ने प्रशासन से वार्ड-वार म्यूनिसिपल सिविक इंफ्रास्ट्रक्चर ब्लूप्रिंट सार्वजनिक करने की मांग की है। उनका कहना है कि किसी भी क्षेत्र में घनत्व वृद्धि या अतिरिक्त विकास अधिकार तभी दिए जाने चाहिए, जब वहां आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हों और उनका विस्तार सुनिश्चित किया जा सके।



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