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छुट्टियों में कहानी, कविता और संवाद से बच्चों का होगा ज्ञानवर्धन



भास्कर न्यूज | यमुनानगर गर्मी की छुट्टियां आमतौर पर बच्चों के लिए आराम, खेलकूद और परिवार के साथ समय बिताने का अवसर होती हैं, लेकिन इस बार शिक्षा विभाग इन छुट्टियों को सीखने और रचनात्मक विकास से जोड़ने की तैयारी कर रहा है। सरकारी स्कूलों में आज से सात जून तक भारतीय भाषा समर कैंप आयोजित किए जाएंगे। इन कैंपों का उद्देश्य विद्यार्थियों को छुट्टियों के दौरान भी ज्ञानवर्धक और आनंददायक गतिविधियों से जोड़ने का है। इनको इसके संदेश भी माता-पिता के मोबाइल पर भेजे जाएंगे, जिससे बच्चे इन गतिविधियों से जुड़े रहे। कैंप में भागीदारी पूरी तरह स्वैच्छिक होगी। कैंप के दौरान विद्यार्थियों को कहानी लेखन, कविता पाठ, भाषण, संवाद, समूह चर्चा, लोक कथाओं के वाचन, नाट्य प्रस्तुति और भाषा आधारित खेलों जैसी गतिविधियों में भाग लेने का अवसर मिलेगा। जीएस भाटिया, सेवानिवृत्त प्राचार्य इन गतिविधियों के माध्यम से बच्चों की भाषाई दक्षता, अभिव्यक्ति क्षमता और रचनात्मक सोच को विकसित करने का प्रयास किया जाएगा। नई शिक्षा नीति के तहत भारतीय भाषाओं और मातृभाषा को शिक्षा का महत्वपूर्ण आधार माना गया है। इसी दिशा में भारतीय भाषा समर कैंप को एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। विभाग का मानना है कि बच्चे अपनी भाषा और स्थानीय संस्कृति से जितना जुड़ेंगे, उनका सीखने का अनुभव उतना ही प्रभावी और सहज होगा। विद्यार्थी उठाएंगे विभाग की पहल का लाभ: संधावा ^भारतीय भाषा समर कैंप का उद्देश्य विद्यार्थियों को अवकाश के दौरान रचनात्मक और भाषा आधारित गतिविधियों से जोड़ना है। कैंप में भागीदारी स्वैच्छिक रखी गई है। किसी भी विद्यार्थी पर आने का दबाव नहीं होगा। स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं कि वे बच्चों और अभिभावकों को कैंप की जानकारी दें। उन्हें भारतीय भाषाओं और स्थानीय संस्कृति से जुड़ी गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रेरित करें। विभाग को उम्मीद है कि बड़ी संख्या में विद्यार्थी इस पहल का लाभ उठाएंगे। – केएस संधावा, जिला परियोजना अधिकारी। कैंपों में स्थानीय बोलियों, लोक साहित्य, लोक गीतों और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी गतिविधियों को भी शामिल किया जाएगा। ताकि विद्यार्थियों को अपनी जड़ों से जुड़ने का अवसर मिल सके। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि छुट्टियों के दौरान बच्चों का स्कूल से जुड़ाव बनाए रखना भी उद्देश्य है। अक्सर लंबे अवकाश के कारण विद्यार्थियों का पढ़ाई से संपर्क कम हो जाता है, लेकिन ऐसे कैंप उन्हें बिना किसी शैक्षणिक दबाव के सीखने का अवसर देंगे। इसमें न तो उपस्थिति की अनिवार्यता होगी, न ही किसी प्रकार का मूल्यांकन किया जाएगा, इसलिए बच्चे अपनी इच्छा और रुचि के अनुसार भाग ले सकेंगे।



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