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CBSE के 'OnMark' पोर्टल बड़ी खामी दूर:स्टूडेंट्स डेटा लीक, मार्क्स में हेराफेरी से बचने का सिक्योरिटी सिस्टम तैयार, रिजल्ट रहेगा सेफ




CBSE के ‘OnMark’ (ऑन-स्क्रीन मार्किंग) पोर्टल पर मंडरा रहा हैकिंग का खतरा अब पूरी तरह टल गया है। सीबीएसई ने अपने X हैंडल पर एक पोस्ट के जरिए बताया है कि ‘OnMark’ पोर्टल की खामियों को आईआईटी के साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट ने दूर कर दिया। सीबीएसई के इस दावे से इस साल 12वीं कक्षा पास करने वाले लुधियाना रिजन के 1.25 लाख स्टूडेंट्स और देशभर के करीब 19 लाख स्टूडेंट्स को राहत मिली है। ऑन मार्क पोर्टल में खामियों की खबर से स्टूडेंट्स बेहद चिंतित थे। सीबीएसई का दावा है कि सिक्योरिटी सिस्टम डेवलप करने के बाद स्टूडेंट्स का पूरा डेटा सेफ है और उनके मार्क्स में भी कोई हेराफेरी नहीं हो सकती है। 19 साल के एक स्टूडेंट और साइबर सिक्योरिटी रिसर्चर निसर्ग अधिकारी के दावा किया था कि सीबीएसई की वेबसाइट को आसानी से हैक किया जा सकता है। निसर्ग अधिकारी के दावों के बाद सीबीएसई ने केंद्र सरकार के अलग-अलग विभागों और देश के बड़े संस्थान आईआईटी (IIT) के साइबर सुरक्षा एक्सपर्ट्स की एक हाई-टेक टीम को काम पर लगाया था। इस टीम ने लीक हुए मास्टर पासवर्ड के लूपहोल को बंद कर दिया है और पूरे डिजिटल मार्किंग सिस्टम को एक ज्यादा सुरक्षित नए सर्वर और तकनीकी सेटअप पर शिफ्ट कर दिया है। इसके साथ ही, सीबीएसई ने पूरी पारदर्शिता बरतते हुए एक ऑफिशियल ईमेल आईडी (secy-cbse@nic.in) भी जारी की है, ताकि अगर किसी भी आम नागरिक या तकनीकी जानकार के पास सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए कोई एक्स्ट्रा जानकारी या काम का सुझाव हो, तो वे सीधे सीबीएसई की कोर सुरक्षा टीम को भेज सकें। 19 साल के रिसर्चर निसर्ग अधिकारी ने किए थे ये 5 बड़े दावे…. सीबीएसई ने अब क्या-क्या हुए बड़े सुधार, जानिए.. समय पर सुधार न होता, तो स्टूडेंट्स को होता यह नुकसान, जानिए… कैसे सामने आई थी वेंडर कंपनी की लापरवाही? यह पूरा मामला सीबीएसई के उस डिजिटल मूल्यांकन सिस्टम से जुड़ा था, जिसके जरिए कक्षा 12वीं की उत्तर पुस्तिकाओं की जांच और नंबरों को ऑनलाइन अपलोड करने का काम किया जा रहा था। शुरुआती जांच में सामने आया कि जिस थर्ड-पार्टी वेंडर कंपनी को इस बेहद संवेदनशील काम का ठेका दिया गया था, उसके सुरक्षा इंतजाम बेहद लचर और ढीले थे। इसके अलावा जमीनी स्तर पर भी तकनीकी प्रबंधन में भारी लापरवाही देखी गई। वेंडर कंपनी के स्तर पर लगभग 5,000 स्टूडेंट्स की कॉपियों को बेहद धुंधला स्कैन किया गया था, जिससे टीचर्स को मूल्यांकन में परेशानी हो रही थी। इसके अलावा, कम से कम 23 ऐसे गंभीर मामले सामने आए जहां एक स्टूडेंट की उत्तर पुस्तिका को किसी दूसरे स्टूडेंट के रोल नंबर और मार्क्सशीट के साथ जोड़ (मिसमैच) दिया गया था। हालांकि, विवाद बढ़ने पर सीबीएसई ने सफाई देते हुए यह भी कहा था कि जिस हिस्से में कमियां पाई गई थीं, वह मुख्य लाइव वेबसाइट नहीं बल्कि सिर्फ एक टेस्टिंग या सैंपल साइट थी। इसके बावजूद, बोर्ड ने किसी भी प्रकार का रिस्क न लेते हुए पूरे सिस्टम को अपग्रेड करने का फैसला लिया।



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