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अंबाला हिरासत में मारपीट केस में हाईकोर्ट पहुंचा पीड़ित:FIR की जांच हरियाणा से बाहर की SIT को सौंपने की मांग, सरकार से भी किया जवाब तलब




अम्बाला पुलिस हिरासत में कथित थर्ड डिग्री मारपीट और गलत गिरफ्तारी के मामले में आरोपी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए जांच पर गंभीर सवाल उठाए हैं। याचिका में कहा गया है कि जिन अधिकारियों को विभागीय जांच में दोषी पाया गया, वही जांच टीम का हिस्सा बने हुए हैं। याचिका पर हाईकोर्ट ने कड़ा संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। वहीं याचिकाकर्ता के एडवोकेट रेणु व प्रदीप आर्य आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ करीबन एक करोड़ मुआवजे की भी याचिका हाईकोर्ट में दायर करेंगे। अब सिलसिलेवार ढंग से जानिए पूरा मामला
गिरफ्तारी के बाद मारपीट के आरोप
अंबाला निवासी साहिल मसीह को 23 सितंबर 2024 को मुकद्मा नंबर 300 में पोक्सो एक्ट के तहत पुलिस ने गिरफ्तार किया था। 24 सितंबर 2024 को उसके खिलाफ थाना पड़ाव में पोक्सो एक्ट के तहत एक केस दर्ज हुआ था। आरोप है कि इसमें तत्कालीन इंस्पेक्टर और महिला एएसआई ने साहिल मसीह को आरोपी बनाया और उसे हिरासत में लिया। साहिल ने आरोप लगाया कि उसे दो दिन से अधिक समय तक अवैध हिरासत में रखा गया और इस दौरान थर्ड डिग्री टॉर्चर किया गया। इसके बाद उसने अदालत का दरवाजा खटखटाया।
अदालत ने मामले का संज्ञान लेते हुए एसपी अंबाला को केस दर्ज करने के आदेश दिए थे। साहिल के मुताबिक, इस मुकद्में में वह बरी हो गया था, क्योंकि यह मुकद्मा ही जाली पाया गया था और सभी दस्तावेज जाली तैयार किए गए थे। इस मामले में साहिल ने आरोप लगाया था कि हिरासत के दौरान पुलिस अधिकारियों ने उसके साथ बेरहमी से मारपीट की। उसके पैरों में सूजन आ गई और वह लंबे समय तक दर्द से परेशान रहा। अदालत के आदेश पर दर्ज हुआ केस
साहिल मसीह ने 25 अक्टूबर 2024 को कस्टडी में टॉर्चर करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कोर्ट में शिकायत दी थी। जिस पर कोर्ट ने संज्ञान लेकर पहले तो संबंधित एसपी से जांच करवाई फिर सभी अधिकारियों के एफिडेविट कोर्ट में पेश करवाए, उसके बावजूद कड़ा संज्ञान लेकर मुकद्मा दर्ज करने के निर्देश जारी किए, जिसके आधार पर 11 नवंबर 2024 को पड़ाव थाना में एफआईआर नंबर 343 दर्ज हुआ। वर्तमान में साहिल के स्वास्थ्य का हाल
साहिल ने यह भी आरोप लगाया कि मारपीट के कारण उसके निजी अंग में सूजन और पस बनने की समस्या हो गई। उसे पेशाब करने में दिक्कत आने लगी और वह ठीक से चल-फिर भी नहीं पा रहा था। उसने अदालत से मेडिकल जांच कराने की मांग की, जिस पर अदालत ने सेंट्रल जेल अंबाला के सुपरिंटेंडेंट को जरूरी निर्देश दिए थे। पुलिस अधिकारियों के खिलाफ दर्ज हुआ केस
11 नवंबर 2024 को थाना पड़ाव में तत्कालीन थाना प्रभारी इंस्पेक्टर देवेंद्र कुमार और महिला एएसआई रामभतेरी के खिलाफ अवैध हिरासत और टॉर्चर के आरोप में केस दर्ज किया गया। अदालत ने 60 दिन के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश भी दिए थे। मामले की जांच पहले डीएसपी मुख्यालय अंबाला विजय ने की। इसके बाद जांच कुरुक्षेत्र ट्रांसफर कर दी गई। वहां डीएसपी रोहतास कुमार की अगुवाई में इंस्पेक्टर सुनील दत्त और तत्कालीन महिला थाना प्रभारी इंस्पेक्टर कुलबीर को शामिल कर एसआईटी गठित की गई। एसआईटी पर भी पक्षपात के आरोप
शिकायतकर्ता साहिल मसीह और उनके वकील प्रदीप आर्य का आरोप है कि कुरुक्षेत्र की एसआईटी ने भी आरोपी पुलिसकर्मियों को बचाने का प्रयास किया। उनका दावा है कि मामले को दबाने के लिए एक पुलिसकर्मी ने 1.50 लाख रुपए देकर समझौता करने की कोशिश की गई। इसके अतिरिक्त हैरानी की बात तो यह है कि डेढ़ लाख वाली शिकायत की जांच मुख्य सचिव गृह विभाग हरियाणा ने अंबाला रेंज आईजी को 15 दिन में जांच पूरी करके विभाग को सौपने के आदेश दिए थे, लेकिन उसकी जांच भी डीएसपी रमेश ने आरोपी पक्ष के बिना ब्यान दर्ज किए ही पूर्ण कर दी।जिस बारे में साहिल मसीह के अधिवक्ता रेणु व प्रदीप आर्य ने संबंधित आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ अलग से याचिका दायर कर दी है। विभागीय जांच में अधिकारी दोषी पाए गए
याचिकाकर्ता के वकील एडवोकेट रेणु व प्रदीप आर्य ने अदालत को बताया कि विभागीय जांच में एएसआई राम भटेरी और इंस्पेक्टर देवेंद्र कुमार को दोषी पाया गया है। इसके बावजूद इंस्पेक्टर देवेंद्र कुमार को जांच टीम में शामिल रखा गया है, जिससे पूरी जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। हाईकोर्ट में याचिका, जांच बदलने की मांग
आरोपी साहिल ने याचिका दायर कर 11 नवंबर 2024 को थाना पड़ाव, अंबाला छावनी में दर्ज एफआईआर नंबर-343 की जांच बदलने की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि मौजूदा जांच निष्पक्ष नहीं है, इसलिए इसे हरियाणा पुलिस से हटाकर राज्य के बाहर के वरिष्ठ अधिकारियों की नई विशेष जांच टीम (एसआईटी) को सौंपा जाए। निष्पक्ष जांच पर सवाल, नई एसआईटी की मांग
एडवोकेट रेणु प्रदीप आर्य के मुताबिक, जब जांच करने वाले अधिकारी पहले से ही दोषी पाए जा चुके हैं, तो उनसे निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं की जा सकती। इसी आधार पर याचिकाकर्ता ने हरियाणा से बाहर के अधिकारियों की नई एसआईटी गठित करने की मांग रखी है। सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता अमीश शर्मा पेश हुए और उन्होंने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। 4 अगस्त 2026 को अगली सुनवाई
न्यायाधीश संजय वशिष्ठ की अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 04 अगस्त 2026 तय की है। अदालत ने सरकार को निर्देश दिए हैं कि अगली तारीख से पहले जवाब दाखिल किया जाए और उसकी प्रति याचिकाकर्ता के वकील को भी दी जाए। फिलहाल अदालत ने कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है। अब हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी निगाहें
मामले में लगातार जांच बदलने और आरोपों के बीच अब सभी की नजरें हाईकोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिकी हुई हैं। यह देखना अहम होगा कि अदालत सरकार के जवाब के बाद जांच को नई दिशा देती है या नहीं।



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