सिरसा में श्री चिन्मय कुट्टी भंडारा समिति में दान राशि को लेकर विवाद का मामला सामने आया है। आरोप है कि समिति में 5 करोड़ रुपए का फर्जीवाड़ा कर दिया और फर्जी तरीके से रसीदें बनवाकर दानवीरों को दे दी गई। इसका खुलासा जब हुआ, समिति के एक सदस्य से ही दान रा
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इसका पता चलने पर समिति सदस्य ने पदाधिकारियों से सवाल किए तो संतोषजनक जवाब नहीं मिला और पिछले लेन-देन का कोई रिकॉर्ड रखा हुआ नहीं था। आरोप है कि समिति का रजिस्ट्रेशन 2016 में हैं और अन्य नाम से लेटर पैड भी 2014-15 की छपवाई हुई है। वहीं लेटर पैड इस्तेमाल कर रहे हैं और दान करने लोगों को फर्जी रसीदें दी जा रही है। दान राशिन व लेन-देन नकद यानी कैश में रखा।
ऐसे में समिति पदाधिकारियों ने सदस्य को निष्कासित भी कर दिया। इसे लेकर समिति के पूर्व सदस्य ने पुलिस को शिकायत दी है। प्राथमिक जांच में पुलिस ने आईपीसी की धारा 420 के तहत केस दर्ज किया है। दोनों पक्षों से जांच के लिए अन्य धाराएं भी जोड़ी जा सकती है।

प्रतीकात्मक फोटो
सिलसिलेवार ढंग से जानिएं पूरा मामला
बैंक के माध्यम से होना चाहिए था लेन-देन
पुलिस को दी शिकायत में पंजाब से बठिंडा के फरीदकोट निवास सुरेंद्र मोंगा ने बताया कि वह चिन्मय कुट्टी भंडारा समिति सिरसा में उक्त समिति का सदस्य है। आरोप है कि समिति के प्रबंध निदेशक व सदस्य समिति धन राशि का दुरुपयोग एवं गबन कर रहे हैं। कुछ रसीदों की प्रविष्टियां कैश बुक में दर्ज नहीं की गई। नियमानुसार समिति का लेन-देन बैंक के माध्यम से होना चाहिए, पर हर लेन-देन केवल नकद में किया जाता है।
पार्टी के सर्वेक्षक सुरेंद्र मोंगा, प्रधान व उप प्रधान, प्रमुख व सीए इस जांच में शामिल किए गए और समिति से संबंधित रिकॉर्ड दस्तावेज पेश किए। जिसमें पाया कि समिति 2014 में पंजीकृत हुई और प्रधान, उप प्रधान भंडारा समिति के पद पर शामिल है। वह खुद समिति के गठन साल 2014 से लेकर 2019 तक समिति के सदस्य रहे। अगस्त 2019 को समिति के महासचिव व अन्य 4 सदस्यों द्वारा उसे निष्कासन कर दिया गया।
साल 2014 से 2025 तक की दान राशि गबन का आरोप
शिकायत में मोंगा ने समिति में साल 2014 से 2025 तक की दान राशि का फर्जी दस्तावेजों के आधार पर गबन करने का आरोप लगाया है। रिकॉर्ड से पता चला है कि ऑडिटर की नियुक्ति के लिए समिति अध्यक्ष द्वारा एक लेटर पैड का उपयोग किया गया। इस लेटर पैड का पहली बार जुलाई 2014 में श्री चिन्मय कुटी प्रस्ताव के पदाधिकारियों द्वारा हस्ताक्षरित किया गया और 2015 में फिर उपयोग किया। इस पर समिति पदाधिकारियों के हस्ताक्षर है।
इस बारे में समिति के अखिल भारतीय पंजीकरण के बारे में प्रश्न किया, जिस पर जवाब दिया कि समिति का पंजीकरण वर्ष 2016 में हुआ था, लेकिन लेटर पैड साल 2015 में छपवाए गए थे। संभवतः प्रिंटिंग प्रेस के कर्मचारी ने गलती से अखिल भारतीय पंजीकृत छपा दिया होगा। इस पर सिरसा एसपी को इसकी शिकायत दी गई और आर्थिक अपराध शाखा द्वारा प्राथमिक जांच कर अध्ययन किया।
लेटर पैड साल 2015 में छपे थे तो यह कैसे संभव
इससे पता चला कि लेखा परीक्षक की नियुक्ति के लिए श्री चिन्मय कुटी भंडारा समिति सोसाइटी, सिरसा के अध्यक्ष सुरेश कुमार द्वारा एक लेटर पैड का उपयोग किया गया है। पहली जुलाई 2014 को प्रस्ताव पारित किया गया। सवाल ये है कि यदि लेटर पैड साल 2015 में छपे थे तो यह कैसे संभव है? इस पर कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दिया। कैश बुक में राशि की प्रविष्टि न होना गबन माना जा सकता है।
जाली दस्तावेज तैयार करने का आरोप
शिकायतकर्ता मोंगा का आरोप है कि पांच करोड़ रुपये का लेन-देन पूरी तरह नकद में हुआ और इसे कैश बुक में दर्ज नहीं किया गया। इसकी जांच की जानी चाहिए। पांच करोड़ रुपये की धोखाधड़ी को सुविधाजनक बनाने के लिए जाली दस्तावेज तैयार करने के आरोप हैं। जांच के बाद आर्थिक अपराध शाखा की सिफारिश पर शहर थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।







