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नूंह की नई अनाज मंडी में इन दिनों अव्यवस्था और लापरवाही का आलम है। हाल ही में हुई बारिश के बाद हजारों क्विंटल गेहूं भीग गया है, जिसे बिना सुखाए सीधे बोरियों में भरा जा रहा है। इस प्रक्रिया से अनाज की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं और किसानों की मेहनत पर पानी फिरता दिख रहा है। सरकार और प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि गेहूं को झरना लगाकर और पूरी तरह सुखाने के बाद ही बैग में भरा जाए। हालांकि, जमीनी हकीकत इन निर्देशों के बिल्कुल विपरीत है। पूरी अनाज मंडी में कहीं भी झरना इस्तेमाल होता नजर नहीं आ रहा है, जिससे यह स्पष्ट है कि आदेश केवल कागजों तक ही सीमित रह गए हैं। मजदूरों को नहीं मिले झरना लगाने के निर्देश मंडी में मजदूर बिना झरना लगाए ही गेहूं की बोरियां भर रहे हैं। मजदूरों ने बताया कि उन्हें एक बोरी भरने के लिए केवल 10 रुपए मिलते हैं और उन्हें झरना लगाने या गेहूं सुखाने के संबंध में कोई निर्देश नहीं दिए गए हैं। ऐसे में वे मजबूरी में भीगी हुई फसल को ही बोरियों में भर रहे हैं। इससे पहले, अतिरिक्त उपायुक्त ज्योति ने आढ़तियों को झरना और अन्य मशीनों का उपयोग करने के सख्त निर्देश दिए थे। लेकिन इन आदेशों का कोई असर दिखाई नहीं दे रहा है। आढ़ती खुलेआम नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। गोदाम कीपर जमील के अनुसार, बार-बार निर्देश देने के बावजूद आढ़ती और मार्केट कमेटी के अधिकारी आदेशों का पालन नहीं कर रहे हैं। खुले में पड़ा भीगा गेहूं तेजी से उठाया जा रहा है, जबकि सुरक्षित स्थानों पर रखा सूखा गेहूं नजरअंदाज किया जा रहा है। मार्केट कमेटी सचिव ने दिए आढ़तियों को आदेश जब इस बारे में मार्किट कमेटी सेकेट्री मनोज कुमार से बात की गई तो उन्होंने कहा कि सभी आढ़तियों को आदेश दे दिए गए हैं और तुरंत प्रभाव से इस पर अमल भी किया जाएगा।
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