नरसिंहपुर जिले में ई-विकास प्रणाली के माध्यम से खाद वितरण के नियमों का उल्लंघन करने वाली पांच निजी फर्मों पर प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है। कलेक्टर रजनी सिंह के निर्देश पर इन फर्मों के उर्वरक लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिए गए हैं। ई-विकास प्रणाली और ई-टोकन अनिवार्य अधिकारियों ने बताया कि कृषि विभाग के निर्देश पर अप्रैल 2026 से पूरे प्रदेश में खाद का वितरण केवल ई-विकास प्रणाली और ई-टोकन के माध्यम से ही किया जाना अनिवार्य है। नरसिंहपुर में इस व्यवस्था की कड़ाई से निगरानी की जा रही है, ताकि वितरण प्रणाली में पारदर्शिता बनी रहे। इन 5 फर्मों के लाइसेंस हुए निलंबित कृषि विभाग के पोर्टल से प्राप्त जानकारी के अनुसार, 2 से 5 अप्रैल के बीच नियमों की अनदेखी करने वाली निम्नलिखित फर्मों पर दंडात्मक कार्रवाई की गई है। साहू कृषि केंद्र, इमलिया आईएफएफडीसी केएसके, तेंदूखेड़ा आईएफएफडीसी कृषक सेवा केंद्र, झिरना (नरसिंहपुर) चौकसे कृषि सेवा सदन, करेली सागर ट्रेडिंग कंपनी, राजमार्ग आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कार्रवाई किसान कल्याण तथा कृषि विकास उप संचालक मोरिस नाथ ने बताया कि यह कार्रवाई आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 और उर्वरक गुण नियंत्रण आदेश 1985 की विभिन्न धाराओं के तहत की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य में भी उर्वरक विक्रय पर निरंतर निगरानी रखी जाएगी और उल्लंघन करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। किसानों से ई-टोकन के उपयोग की अपील कलेक्टर श्रीमती रजनी सिंह ने जिले के किसानों से आग्रह किया है कि वे अपनी खाद की आवश्यकता के लिए अनिवार्य रूप से ई-विकास पोर्टल पर ई-टोकन प्राप्त करें। इससे वितरण व्यवस्था सुगम होगी और किसानों को शासन की महत्वपूर्ण योजनाओं का सीधा लाभ मिल सकेगा।



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