गाजीपुर के फतेहुल्लाहपुर स्थित SAEL एग्री कमोडिटीज लिमिटेड में कृषि क्षेत्र में नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के प्रभावी प्रबंधन और बढ़ते महत्व पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह संगोष्ठी पी.जी. कॉलेज, गाजीपुर के बी.एस-सी. (कृषि) VII सेमेस्टर के छात्रों के ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव (RAWE) कार्यक्रम के तहत आयोजित की गई थी। संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य किसानों, छात्रों और कृषि विशेषज्ञों को नवीकरणीय ऊर्जा के महत्व, उपयोगिता और सतत विकास में इसके योगदान के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम का शुभारंभ लक्ष्य गीत और अतिथियों के माल्यार्पण के साथ हुआ। कंपनी के प्रबंधक प्रिंस गक्खर ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा न केवल पर्यावरण संरक्षण का माध्यम है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने का भी एक प्रभावी साधन है। उन्होंने बताया कि कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा संचालित पंप, ड्रिप सिंचाई प्रणाली और बायोगैस संयंत्रों का उपयोग किसानों की लागत कम करने के साथ-साथ उत्पादन क्षमता को भी बढ़ाता है। गक्खर ने यह भी उल्लेख किया कि SAEL एग्री कमोडिटीज किसानों के साथ मिलकर ऐसे प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है, जो ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देते हैं। विशिष्ट वक्ता और RAWE कोऑर्डिनेटर प्रोफेसर (डॉ.) जी. सिंह ने RAWE कार्यक्रम के अंतर्गत छात्रों की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी नवीकरणीय ऊर्जा के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है और छात्रों को गांवों में जाकर किसानों को आधुनिक तकनीकों एवं ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों के बारे में जागरूक करने के लिए प्रेरित किया, जिससे कृषि क्षेत्र में सतत विकास सुनिश्चित हो सके। कंपनी के एच.आर. हेड हिमांक यादव ने नवीकरणीय ऊर्जा के बढ़ते महत्व पर जोर देते हुए कहा कि वर्तमान समय में ऊर्जा की मांग तेजी से बढ़ रही है। जबकि पारंपरिक ऊर्जा स्रोत सीमित होते जा रहे हैं। ऐसे में सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, बायोगैस एवं जल ऊर्जा जैसे विकल्प ही भविष्य के लिए सुरक्षित एवं टिकाऊ समाधान प्रदान कर सकते हैं।कार्यक्रम में उपस्थित किसानों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि सौर ऊर्जा से संचालित उपकरणों के उपयोग से उनकी उत्पादन लागत में कमी आई है और उन्हें बेहतर लाभ प्राप्त हो रहा है। साथ ही, बायोगैस संयंत्रों के माध्यम से घरेलू ऊर्जा की आवश्यकता भी पूरी हो रही है, जिससे पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता कम हो रही है। संगोष्ठी के दौरान विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई, जिनमें सौर ऊर्जा के उपयोग, पवन ऊर्जा की संभावनाएं, बायोगैस संयंत्रों की स्थापना एवं प्रबंधन, तथा जल संरक्षण के उपाय प्रमुख रहे। विशेषज्ञों ने बताया कि यदि इन संसाधनों का सही तरीके से प्रबंधन किया जाए, तो यह न केवल ऊर्जा संकट को कम कर सकते हैं, बल्कि पर्यावरण प्रदूषण को भी नियंत्रित करने में सहायक सिद्ध होते हैं। संगोष्ठी के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने नवीकरणीय ऊर्जा से संबंधित अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया।
विशेषज्ञों ने सभी प्रश्नों का सरल एवं व्यावहारिक उत्तर देकर उपस्थित लोगों को संतुष्ट किया। कार्यक्रम के समापन अवसर पर आयोजकों ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन भविष्य में भी निरंतर किए जाते रहेंगे, ताकि समाज में नवीकरणीय ऊर्जा के प्रति जागरूकता बढ़े और सतत विकास के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके। अंततः यह संगोष्ठी न केवल ज्ञानवर्धक रही, बल्कि इसने प्रतिभागियों को नवीकरणीय ऊर्जा के महत्व को समझने एवं उसे अपने जीवन एवं कार्यक्षेत्र में अपनाने के लिए प्रेरित भी किया। इस कार्यक्रम मे इंजी० विपिन चंद्र झा, डॉ० योगेश कुमार,प्रोफे०(डॉ०) अरुण कुमार यादव , डॉ० अशोक कुमार, महिपाल सिंह भोज, विपुल उपाधयाय, डी० के० शर्मा, दिनेश यादव, संजीव काम्बोज एवं पी० जी० कॉलेज गाजीपुर के छात्र छात्राएं आदि उपस्थित रहे ।संचालन कंपनी के एच० आर० हिमांक यादव ने किया।



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